मायावती का केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला: बेरोजगारी और महंगाई को बताया चिंताजनक, सरकारी नौकरियों पर ध्यान देने की मांग

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश के मौजूदा हालातों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में आज बेरोजगारी, महंगाई, अशिक्षा और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्याएं विकराल रूप ले चुकी हैं, लेकिन इन मुद्दों पर सरकारों की उदासीनता बेहद चिंताजनक है।

अपनी सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बसपा ने अपने शासनकाल के दौरान अकेले पुलिस और पंचायती राज विभाग में करीब ढाई लाख नए सरकारी पदों का सृजन किया था। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए हालिया आंदोलनों ने इन गंभीर और ज्वलंत मुद्दों को राष्ट्रीय महत्व के केंद्र में ला खड़ा किया है, जिसके दबाव के चलते देश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री को भी अपना पद गंवाना पड़ा था।

‘सवा सौ करोड़ गरीबों और युवाओं की चिंता करे सरकार’

सोमवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में बसपा सुप्रीमो ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को देश के करीब सवा सौ करोड़ गरीबों, मेहनतकश श्रमिकों, युवाओं और महिलाओं की वास्तविक भलाई और चिंता करनी चाहिए। राष्ट्रीय संपत्तियों और सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में बेचना पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए तथा सरकारी नौकरियों के सृजन पर विशेष ध्यान देना होगा।

उन्होंने मांग की कि सभी सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों रिक्त पदों पर बिना किसी पेपर लीक या भ्रष्टाचार के, पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से नई भर्तियां तत्काल शुरू की जानी चाहिए।

मानवतावादी नीति लागू करने की पुरजोर वकालत

सरकार को सुझाव देते हुए मायावती ने कहा कि यदि देश के प्रत्येक परिवार में कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिल जाए, तो इससे लाखों परिवारों का सीधा और स्थाई भला हो सकेगा। इसके साथ ही इससे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोगों को संवैधानिक आत्म-सम्मान और सुरक्षा भी प्राप्त होगी।

सरकारों को मुनाफाखोरी और विशुद्ध व्यापारिक सोच को त्यागकर भारतीय संविधान की सच्ची मानवतावादी नीति को जमीन पर लागू करना होगा। उन्होंने कहा कि ‘हर हाथ को काम’ देने वाली यह नीति देश के व्यापक जनहित में सभी समस्याओं की एक अचूक दवा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि जंतर-मंतर पर आंदोलित युवाओं के गंभीर मुद्दों पर संसद के वर्तमान सत्र में जारी गतिरोध को जल्द समाप्त किया जाना चाहिए।

भाजपा और आम आदमी पार्टी से सतर्क रहने की नसीहत

अपने बयान के दूसरे हिस्से में मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) दोनों दलों से बहुजन समाज और देश की जनता को पूरी तरह सतर्क रहने की कड़ी नसीहत दी। उन्होंने 10 अगस्त 2019 की उस घटना का जिक्र किया जब दिल्ली के तुगलकाबाद में संत गुरु रविदास के ऐतिहासिक गुरुघर को बुलडोज़र चलाकर ढहा दिया गया था। उस दौरान इसके विरोध में पूरे देश में जोरदार प्रदर्शन हुए थे, जिसमें पुलिस लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों का सामना करते हुए कई लोग जेल तक गए थे।

उन्होंने अफसोस जताया कि आज भी उस गुरुघर की मूल भूमि छीनी जा चुकी है, जिसके कारण देश-विदेश की करोड़ों संगत आज भी वहां अस्थायी टीन शेड के नीचे माथा टेकने को मजबूर है।

यह स्थिति देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को भारी आहत पहुंचाने वाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा एक बार फिर संत रविदास के नाम पर कलश यात्राएं निकालकर समाज को गुमराह करने और भटकाने का प्रयास कर रही है।

इसके अलावा, उन्होंने धलेता गांव में गुरुघर की दीवार गिराए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि बसपा और स्थानीय संगत के कड़े विरोध के बाद ही आम आदमी पार्टी की सरकार को वहां पुनर्निर्माण कराने के लिए मजबूर होना पड़ा था। अंत में उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे भाजपा और आम आदमी पार्टी की इस प्रकार की स्वार्थी राजनीतिक चालों से पूरी तरह सावधान रहें।