हरियाणा की ड्रीम पॉलिसी: शिक्षक तबादलों के अधूरे सपनों की हकीकत?

सरकार ने घोषणा की थी कि इस वर्ष तबादले अप्रैल में होंगे, किंतु सितंबर तक भी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। यह देरी न केवल शिक्षकों के साथ वादाख़िलाफ़ी है, बल्कि छात्रों की पढ़ाई और विद्यालयों के संचालन पर भी सीधा आघात है। हरियाणा सरकार की “ड्रीम पॉलिसी” का उद्देश्य था शिक्षक तबादलों में पारदर्शिता और […]

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एक पुलिसिया फरमान और लाखों की रोजी-रोटी का सवाल: क्या ये अमृत काल का ‘विकास’ है?

उत्तर प्रदेश में एक नई व्यवस्था शुरू हुई थी, जिसका नाम है पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था। कहने को तो यह ब्रिटिशकाल की व्यवस्था है, लेकिन लगता है इसे आधुनिक भारत के ‘अमृत काल’ में कुछ ज्यादा ही शक्तियाँ दे दी गई हैं। अब पुलिस खुद ही आरोपी को पकड़ती है, और कुछ मामलों में तो खुद […]

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खाना वही, बिल दोगुना: ऑनलाइन फूड डिलीवरी का काला सच

आजकल ज़िंदगी की रफ़्तार इतनी तेज़ हो गई है कि हमें हर चीज़ दरवाज़े पर चाहिए। घर बैठे खाना मंगाना अब एक आदत बन गई है, जिसमें स्विगी और जोमैटो जैसे ऐप्स का अहम रोल है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि इस ‘सुविधा’ की असली कीमत क्या है? हाल ही में एक ग्राहक […]

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आगरा शहर की ‘रईसी’ का असली चेहरा: जहाँ पैदल चलना है एक अपराध

आगरा। ताज का शहर। और अब… बड़ी-बड़ी गाड़ियों और उनके बड़े-बड़े अहंकार का शहर। शहर की महानता का पैमाना अब उसकी विरासत नहीं, बल्कि यह तय करता है कि उस शहर में बिना कार वाला इंसान, यानि दूसरे दर्जे का नागरिक, सड़क पर चलने के लिए कितनी जगह पाता है। या नहीं पाता है। ज़रा […]

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भारत की चिप क्रांति : सपनों से साकार होती हकीकत

उम्मीदों की चिप ने दिए आत्मगौरव और नवाचार को पंख भारत आज उस ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ तकनीकी आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक प्रगति का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गर्व और वैश्विक नेतृत्व की दिशा भी बन गई है। दशकों तक चिप और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल उपभोक्ता के रूप में पहचाने जाने वाला भारत […]

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पंजाब में बाढ़ आखिर क्यों: प्रकृति की चेतावनी या इंसानी लापरवाही का नतीजा?

“प्रकृति चेतावनी देती है, रुष्ट नहीं होती – असली वजह इंसानी लापरवाही और असंतुलित विकास” पंजाब में बाढ़ को केवल प्राकृतिक आपदा कहना सही नहीं होगा। नदियों का स्वरूप, असामान्य बारिश और जलवायु परिवर्तन तो कारण हैं ही, लेकिन असली दोषी अनियोजित निर्माण, अवैध खनन, ड्रेनेज की उपेक्षा और धान-प्रधान कृषि पद्धति भी है। प्रकृति […]

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एससीओ 2025 और भारत की तीन-स्तंभ रणनीति : सुरक्षा, संपर्क और अवसर

भारत की भूमिका और तियानजिन घोषणा की उपलब्धियों का मूल्यांकन तियानजिन में आयोजित 25वें एससीओ शिखर सम्मेलन 2025 ने भारत की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की तीन-स्तंभ रणनीति—सुरक्षा, संपर्क और अवसर—प्रस्तुत करते हुए आतंकवाद पर शून्य-सहनशीलता, संप्रभुता-सम्मानजनक संपर्क और तकनीक व संस्कृति में अवसरों को बढ़ावा देने पर बल […]

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जीएसटी पर सियासत या राहत: ‘एक देश, एक टैक्स’ और बदलती नीतियों का सच…

जीएसटी दरों में कटौती जनता के लिए राहत का संकेत है, लेकिन बार-बार बदलते तर्क सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हैं। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने नौ साल तक ऊँची दरों को ज़रूरी बताते हुए उनके फायदे गिनाए। अब दरें घटाने पर वही तर्क उलटे रूप में दिए जा रहे हैं। […]

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शिक्षा का बाज़ार और कोचिंग की बढ़ती निर्भरता: जब विद्यालय शिक्षण का केंद्र नहीं रहते, तो शिक्षा व्यापार बन जाती है…

हर तीसरा स्कूली छात्र प्राइवेट कोचिंग ले रहा है। शहरी परिवार औसतन 3988 रुपये सालाना कोचिंग पर खर्च कर रहे हैं। ग्रामीण परिवार औसतन 1793 रुपये सालाना खर्च करते हैं। विद्यालयों की शिक्षण गुणवत्ता कमजोर होने से अभिभावक मजबूर हैं। कोचिंग से शिक्षा असमानता और रटंत संस्कृति बढ़ रही है। आज शिक्षा का स्वरूप केवल […]

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नकली दवाओं के धंधे में भारत अव्वल: सपा सांसद ने दवा कंपनियों से चंदा लेने के बाद सरकार की चुप्पी पर उठाये सवाल

आगरा: कल की बारिश ने शहर की धूल को भले ही कुछ देर के लिए शांत कर दिया हो, लेकिन आगरा के नकली दवा कारोबार पर हुई छापेमारी ने एक ऐसी धूल उड़ाई है, जिसकी परतें इतनी मोटी हैं कि साफ़-साफ़ कुछ दिख नहीं रहा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन ने इसी धूल […]

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