मंच पर फूट-फूटकर रोए कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद: आरक्षण की मांग पर छलका दर्द, अखिलेश यादव बोले- ये पश्चाताप के आंसू हैं या प्रायश्चित के?

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गोरखपुर/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार को उस समय बड़ा नाटकीय मोड़ देखने को मिला, जब योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद एक सार्वजनिक मंच पर अपना भाषण देते हुए फूट-फूटकर रोने लगे। गोरखपुर के महंत दिग्विजय नाथ पार्क में निषाद आरक्षण को लेकर आयोजित ‘महारैली’ के दौरान डॉ. निषाद इतने भावुक हो गए कि उनका गला भर आया और वे खुद को संभाल नहीं पाए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उन पर बड़ा तंज कसा है।

​”हमें लैला नहीं, रैला चाहिए”: डॉ. संजय निषाद

महारैली को संबोधित करते हुए संजय निषाद ने कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “आप लोगों ने किसी भाड़े वाले को नहीं, बल्कि अखाड़े वाले पहलवान को लाया है। हमें अब ‘लैला’ (मनोरंजन) नहीं चाहिए, हमें पूरे प्रदेश में ‘रैला’ (ताकत) निकालना है।” उन्होंने निषाद समाज से अपील की कि वे अपनी राजनीतिक ताकत पहचानें और 11 विधायकों की शक्ति को और बढ़ाएं।

​आरक्षण के मुद्दे पर छलका दर्द

​समाज के पिछड़ेपन का जिक्र करते हुए डॉ. निषाद भावुक हो गए। उन्होंने आरोप लगाया, “पिछली सरकारों ने निषाद समाज को केवल वोट बैंक समझा। हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी गई और बच्चों का भविष्य पीछे धकेल दिया गया। जब मैं सदन में आवाज उठाता हूं, तब बुलडोजर चलता है।” यह कहते हुए वे भावुक होकर रोने लगे और समाज से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि निषादों का असली विरोध समाजवादी पार्टी ही करती है।

अखिलेश यादव का तंज: “हम थे जिनके सहारे, वो हुए न हमारे”

​संजय निषाद के इस वीडियो को शेयर करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। अखिलेश ने लिखा ​”ये भाजपा के साथ जाने पर पश्चाताप के आंसू हैं या प्रायश्चित के? पीड़ा बढ़ रही है… पीड़ित बढ़ रहे हैं… इसीलिए PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) बढ़ रहा है। जनता कह रही है कि इस वीडियो के बैकग्राउंड में जो गाना हमें सुनाई दे रहा है वो हमारा भ्रम है या सच है: हम थे जिनके सहारे, वो हुए न हमारे…”

​अखिलेश यादव के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि क्या निषाद पार्टी और बीजेपी के बीच सब कुछ ठीक है, या फिर यह चुनाव से पहले दबाव बनाने की कोई नई रणनीति है।