लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट तेज होते ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी संगठनात्मक और चुनावी तैयारियों को आक्रामक रूप देना शुरू कर दिया है। राज्य की सत्ता में हैट्रिक लगाने के उद्देश्य से भाजपा ने एक वृहद रणनीति तैयार की है, जिसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदेश के सभी 18 प्रशासनिक मंडलों में विशाल रैलियों के जरिए चुनावी मैदान में उतारा जाएगा। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह क्षेत्रवार बैठकों और बूथ स्तरीय सम्मेलनों के माध्यम से संगठन के किलेबंदी की जिम्मेदारी संभालेंगे। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद पदयात्राओं और आक्रामक जनसंपर्क के जरिए पूरे प्रदेश में माहौल बनाने में जुट गए हैं।
तीन स्तरों पर भाजपा की अभेद्य रणनीति
भाजपा की इस रणनीति का मुख्य फोकस शीर्ष नेतृत्व से लेकर जमीनी बूथ स्तर तक जिम्मेदारियों का सटीक बंटवारा करना है।
पीएम नरेंद्र मोदी मंडल मुख्यालयों पर विशाल रैलियों के जरिए प्रदेशव्यापी राजनीतिक संदेश देंगे। (इन रैलियों का विस्तृत शेड्यूल 20 नवंबर के बाद घोषित होने की संभावना है।)
अमित शाह क्षेत्रवार समीक्षा बैठकें और बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन आयोजित कर माइक्रो-मैनेजमेंट संभालेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी/वरिष्ठ नेता नितिन नवीन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य प्रमुख चेहरा विभिन्न जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करेंगे।
इस त्रिस्तरीय रणनीति का एक प्रमुख उद्देश्य उन क्षेत्रों और विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित करना है, जहां भाजपा को 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में अपेक्षा के अनुरूप सफलता नहीं मिल सकी थी।
गाजियाबाद में सीएम योगी और कानपुर में ब्रजेश पाठक की पदयात्रा
भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन (दिल्ली-6 मॉल के समीप) में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशाल पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस पदयात्रा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
इसी क्रम में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की कमान संभालते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की अगुवाई में कानपुर में पदयात्रा आयोजित की गई। इससे पूर्व 3 नवंबर को लखनऊ और बरेली तथा 4 नवंबर को गोरखपुर, प्रयागराज और कानपुर क्षेत्र में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पदयात्राएं निकाली जा चुकी हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपने छह संगठनात्मक क्षेत्रों में कैडर को सक्रिय करने में जुटी है।
विपक्ष के ‘वोट चोरी’ आरोपों पर भाजपा का तीखा प्रहार
भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान केवल जनसंपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक संदर्भ बेहद महत्वपूर्ण है। विपक्षी दल लगातार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित ‘वोट चोरी’ और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।
भाजपा इन पदयात्राओं के जरिए जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं पर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह राजनीतिक रूप से प्रेरित और हताशा का परिणाम हैं। पार्टी विपक्ष के ‘संविधान बचाओ’ के विमर्श का मुकाबला लोकतंत्र की मजबूती और पारदर्शी चुनावी व्यवस्था के अपने पक्ष को रखकर कर रही है।
कुल मिलाकर, भाजपा 2027 के महासंग्राम से काफी पहले अपने पूरे तंत्र को सक्रिय कर मैदान में उतर चुकी है, ताकि 2022 और 2024 के अनुभवों से सबक लेते हुए अपनी राजनीतिक जमीन को और अधिक पुख्ता किया जा सके।

