शामली में जल जीवन मिशन का बड़ा स्कैम: 254 करोड़ डकार कर कंपनियां लापता, 174 गांवों में मची त्राहि-त्राहि, डीएम ने तलब किया ब्योरा

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शामली: उत्तर प्रदेश के शामली जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिले के 230 गांवों में घर-घर शुद्ध पानी पहुँचाने के नाम पर 254 करोड़ रुपये का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन काम पूरा किए बिना ही ठेकेदार कंपनियां ‘लापता’ हो गई हैं। आलम यह है कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।

करोड़ों का भुगतान, फिर भी काम अधूरा

​शामली के 230 गांवों में पानी की टंकियों और पाइपलाइन बिछाने के लिए वर्ष 2022 में करीब 500 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इसका जिम्मा ‘जेएमसी लक्ष्मी’ और ‘गायत्री’ नामक दो संस्थाओं को दिया गया।

​हैरान करने वाला आंकड़ा ये है कि चार साल बीत जाने के बाद भी केवल 56 गांवों में काम पूरा हो सका है। 174 गांवों में निर्माण कार्य अधर में लटका है। कंपनियों को कुल बजट का आधा यानी 254 करोड़ रुपये मिल चुके हैं, लेकिन पिछले डेढ़ साल से साइट पर न मजदूर दिख रहे हैं और न ही कोई इंजीनियर।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सड़कें और टंकियां

ग्रामीणों का आरोप है कि पाइपलाइन डालने के नाम पर गांवों की पक्की सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। हसनपुर लुहारी में बीच सड़क पर गहरे गड्ढे हादसों को दावत दे रहे हैं, तो खेड़ा भाऊ में बिछाई गई पाइपलाइन जगह-जगह से लीक हो रही है। रज्जाक नगर में तो टंकी और पाइपलाइन तैयार है, लेकिन दो साल से सप्लाई शुरू नहीं की गई। जो निर्माण हुआ है, वह भी अब रखरखाव के अभाव में जर्जर होने लगा है।

जिलाधिकारी सख्त, कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी

​मामले की गंभीरता को देखते हुए शामली के जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने पूरी रिपोर्ट तलब करते हुए सवाल उठाया है कि भारी-भरकम बजट जारी होने के बाद भी काम बंद क्यों है? उन्होंने दोषी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

जल निगम के एक्सईएन फूल कुमार ने बताया कि जेएमसी लक्ष्मी और गायत्री संस्थाओं को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। विभाग अब इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने और कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

​विकास की बाट जोहते गांव

जहां आदमपुर, बाबरी और भैंसवाल जैसे 56 गांवों में काम पूरा हुआ है, वहीं लिसाढ़, सोंटा, फतेहपुर और गढ़ी पुख्ता जैसे 174 गांव आज भी बदहाली का शिकार हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ‘हर घर जल’ का सपना शामली के लिए फिलहाल एक अधूरा वादा ही बना हुआ है।