बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड में बड़ा खुलासा, अयोध्या से दबोचा गया बलिया का शार्प शूटर

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अयोध्या/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। बंगाल की राजनीति में भूचाल लाने वाली इस वारदात के मुख्य आरोपी और बलिया के रहने वाले शार्प शूटर राज सिंह को सोमवार को रामनगरी अयोध्या से गिरफ्तार कर लिया गया। कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने अयोध्या पुलिस के साथ एक संयुक्त घेराबंदी कर इस हाईप्रोफाइल अपराधी को दबोचने में कामयाबी हासिल की।

​साक्ष्यों के आधार पर कसा शिकंजा

जांच एजेंसियों के मुताबिक, हत्या के बाद घटनास्थल पर छूटे ‘फुटप्रिंट’ (पदचिह्न) और तकनीकी सर्विलांस ही राज सिंह की गिरफ्तारी की मुख्य कड़ी बने। पेशेवर तरीके से की गई इस हत्या के बाद आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। पुलिस की निगाहें तकनीकी साक्ष्यों के जरिए उस पर टिकी थीं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि हत्या की इस वारदात में राज सिंह ही वह मोहरा था जिसने ट्रिगर दबाया था।

​अयोध्या को बनाया था सुरक्षित ठिकाना

कोलकाता में सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद राज सिंह अपनी पहचान छिपाकर अयोध्या में शरण लिए हुए था। सूत्रों का कहना है कि वह बलिया का निवासी है लेकिन पिछले कुछ समय से छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में सक्रिय था। वह बस्तर से ही अपना पूरा आपराधिक नेटवर्क संचालित कर रहा था। अब एजेंसियां उसके वित्तीय लेन-देन और विभिन्न राज्यों में फैले उसके संपर्कों की सघनता से जांच कर रही हैं।

​सियासी गलियारों में हड़कंप

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि मृतक चंद्रनाथ रथ भाजपा नेता और बंगाल के भावी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बेहद खास और उनके निजी सहायक (PA) थे। उनकी हत्या उस वक्त हुई जब शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी में थे। इस वारदात को सीधे तौर पर सरकार और व्यवस्था को दी गई चुनौती माना गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर राज सिंह को बंगाल ले जाकर पूछताछ शुरू कर दी है।

​संभल से जुड़े साजिश के तार

इस हत्याकांड की जांच की आंच उत्तर प्रदेश के संभल जिले तक भी पहुंच गई है। दो दिन पहले कोलकाता पुलिस ने संभल में डेरा डाला था, जहां यह खुलासा हुआ कि वारदात में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड संभल के पते पर खरीदे गए थे। पुलिस अब उस नेटवर्क को खंगाल रही है जिसने शूटरों को रसद और तकनीकी सहायता प्रदान की थी। हालांकि अभी इसका विस्तृत ब्यौरा नहीं मिल पाया है। आशंका जताई जा रही है कि पूछताछ में उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बंगाल के कई बड़े सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं।