आगरा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की ताजनगरी में क्रियान्वित हो रहे आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट (Agra Metro Rail Project) के दूसरे कॉरिडोर के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक बेहद बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है।
आगरा कैंट से लेकर कालिंदी विहार तक बनने वाले इस दूसरे महत्वपूर्ण मेट्रो कॉरिडोर के अंतर्गत स्टेशन और वायडक्ट (Viaduct) निर्माण की राह को आसान बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 550 वर्गमीटर नजूल भूमि (Nazul Land) को उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) को पूरी तरह से निःशुल्क हस्तांतरित करने की आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है।
सोमवार को राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित हुई कैबिनेट की उच्चस्तरीय बैठक में इस लोकहित से जुड़े प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई।
साईं का तकिया चौराहे पर निर्माण के लिए चाहिए थी जमीन, जिलाधिकारी ने भेजा था प्रस्ताव
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के द्वितीय चरण के अंतर्गत दूसरे कॉरिडोर यानी ‘आगरा कैंट से कालिंदी विहार सेक्शन’ पर काम शुरू करने के लिए जमीनी सर्वे चल रहा था। इस रूट के प्रमुख ‘साईं का तकिया’ चौराहे पर एक आधुनिक मेट्रो स्टेशन और मजबूत वायडक्ट निर्माण के लिए कॉरपोरेशन को अतिरिक्त सरकारी भूमि की नितांत आवश्यकता थी। प्रोजेक्ट में आ रही इस व्यावहारिक जरूरत को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) आगरा ने विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर शासन स्तर पर भूमि आवंटन का एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा था।
प्रशासन द्वारा इसके लिए मौजा चक अव्वल, तहसील सदर के अंतर्गत आने वाले खसरा संख्या 618 और नजूल भूखंड संख्या 1619 में स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय (Regional Employment Office) परिसर की उस भूमि को चिन्हित किया गया था, जो वर्तमान में एक पार्क के रूप में पूरी तरह से रिक्त (खाली) पड़ी हुई थी।
एमडी UPMRC के अनुरोध पर हुआ परीक्षण, कैबिनेट ने विशेष परिस्थिति में दी मंजूरी
आगरा जिला प्रशासन के प्रस्ताव के साथ ही उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक (MD) की ओर से भी इस चिन्हित नजूल भूमि के तत्काल आवंटन और स्वामित्व हस्तांतरण के लिए नगर विकास और आवास विभाग से विशेष अनुरोध किया गया था। प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव का गहन परीक्षण किए जाने के बाद, इसे अंतिम स्वीकृति के लिए सोमवार को कैबिनेट के पटल पर रखा गया, जहां मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इसे तुरंत हरी झंडी दे दी गई।
कैबिनेट से पारित हुए इस नीतिगत प्रस्ताव के नियमों के अनुसार, इस 550 वर्गमीटर नजूल भूमि को वर्तमान सर्किल दर (Circle Rate) के वित्तीय दायित्वों से पूरी तरह छूट प्रदान करते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को शून्य शुल्क (निःशुल्क) पर हमेशा के लिए हस्तांतरित कर दिया जाएगा। हालांकि, राज्य शासन ने इस आदेश के साथ एक विशेष नोट भी जारी किया है, जिसमें यह पूरी तरह स्पष्ट किया गया है कि भूमि हस्तांतरण का यह उदार निर्णय केवल मेट्रो जैसी जनहितैषी परियोजना की ‘विशेष परिस्थिति’ को देखते हुए ही लिया गया है; इसे भविष्य में किसी अन्य सरकारी या निजी भूमि आवंटन के मामले में कानूनी नजीर (दृष्टांत) के रूप में स्वीकार या प्रस्तुत नहीं किया जा सकेगा।
घनी आबादी को मिलेगा फायदा, थमेगा सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव
राज्य सरकार और यूपीएमआरसी के विशेषज्ञों का मानना है कि कैबिनेट के इस बड़े फैसले से आगरा मेट्रो के दूसरे कॉरिडोर के सिविल निर्माण कार्य में अभूतपूर्व तेजी आएगी और भूमि विवाद की कोई स्थिति नहीं बचेगी।
आगरा कैंट से शुरू होकर कालिंदी विहार तक जाने वाला यह पूरा कॉरिडोर ताजनगरी के सबसे घनी आबादी और व्यावसायिक गतिविधि वाले मुख्य हिस्सों को आपस में सीधे जोड़ेगा, जिससे प्रतिदिन लाखों स्थानीय यात्रियों और विदेशी पर्यटकों को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा सुलभ हो सकेगी। इसके साथ ही, इस मेट्रो कॉरिडोर के पूरी तरह तैयार हो जाने पर आगरा शहर की सड़कों पर वाहनों का ट्रैफिक दबाव काफी हद तक कम होगा और शहरी परिवहन की बुनियादी व्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी।


