आगरा (पिनाहट): उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के पिनाहट क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सूबे की न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता को झकझोर कर रख दिया है। अपनी पैतृक जमीन को दबंगों के चंगुल से छुड़ाने के लिए दर-दर भटक रहे एक बुजुर्ग बृज मोहन शर्मा ने अंततः हार मानकर मौत का रास्ता चुन लिया। द्वितीय नहर पंप हाउस के पास विषाक्त पदार्थ खाने से पहले बुजुर्ग ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उनके आंसू और शब्द सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
”योगी जी, आप सरकार चलाओ, मैं तो जा रहा हूं”
जहर खाने से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में बृज मोहन शर्मा फूट-फूटकर रोते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए भारी मन से कहा, “योगी जी, अब आप आराम से सरकार चलाइए। आपके सारे अधिकारी भ्रष्ट हैं, वे पीड़ितों की नहीं सुनते। मुझ जैसे बुजुर्ग को न्याय मिलना तो दूर, अधिकारियों ने दबंगों से मिलकर मुझ पर ही फर्जी मुकदमे लाद दिए।” यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और शासन-प्रशासन के लिए बड़ी फजीहत का सबब बन गया है।
दबंगों का कब्जा और पुलिस का ‘डंडा’
पीड़ित बुजुर्ग का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर दबंगों ने पुलिस और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कब्जा कर लिया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में उन पर हमला हुआ था, जिसके कारण वे विकलांग हो गए, लेकिन पुलिस ने दोषियों पर कार्रवाई नहीं की। न्याय मांगने पर उल्टा पीड़ित पर ही मुकदमे दर्ज कर दिए गए।
बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि उन्हें घर में कैद कर दिया गया है और इलाज तक के लिए बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा।
अस्पताल में जंग, महकमे में हड़कंप
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में बुजुर्ग को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। हालांकि पुलिस अब न्याय का आश्वासन दे रही है, लेकिन सवाल वही है कि क्या एक आम नागरिक को अपनी बात सुनाने के लिए मौत को गले लगाना पड़ेगा?
यह मामला सीधे तौर पर तहसील और थाना स्तर पर होने वाली सुनवाई की पोल खोलता है, जहाँ मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) की शिकायतों के बावजूद एक बुजुर्ग को कोई राहत नहीं मिली।
रिपोर्टर- नीरज परिहार

