मेरठ: प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित मेरठ दौरे से ठीक पहले सुरक्षा व्यवस्था में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कार्यक्रम स्थल के बिल्कुल करीब आसमान में एक संदिग्ध ड्रोन मंडराता हुआ नजर आया। वीवीआईपी मूवमेंट और मुख्यमंत्री की पुख्ता सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इलाके में पहले से ही भारी पुलिस बल के साथ-साथ तमाम सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद थीं। ऐसे में आसमान में किसी भी तरह की अनाधिकृत गतिविधि पाबंदी के दायरे में आती है, जिसे देखते ही प्रशासनिक अधिकारियों के माथे पर बल पड़ गए और उन्होंने तुरंत अपनी सतर्कता कई गुना बढ़ा दी।
कार्यक्रम स्थल के ठीक पास इस लावारिस ड्रोन को हवा में उड़ता देख मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ गए। उन्होंने फौरन ऐक्शन लेते हुए आसपास मौजूद आम नागरिकों और वहां कवरेज के लिए खड़े मीडियाकर्मियों से इस संबंध में पूछताछ शुरू कर दी। अधिकारियों ने यह गहराई से टटोलने की कोशिश की कि आखिरकार यह ड्रोन किसका है और इस वक्त इसे कौन नियंत्रित कर रहा है। हालांकि, मौके पर मौजूद तमाम मीडिया कर्मियों ने साफ इनकार किया कि इस ड्रोन से उनका कोई लेना-देना है और न ही यह उनका है।
मामले की नजाकत और वीवीआईपी सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने बिना वक्त गंवाए लाउडस्पीकर और हैंड माइक का सहारा लिया। माइक के जरिए ड्रोन ऑपरेटर को सख्त लहजे में चेतावनी दी गई कि वह फौरन अपने उपकरण को नीचे उतारे। पुलिस प्रशासन की ओर से कड़े शब्दों में यह स्पष्ट किया गया कि इस हाई-सिक्योरिटी जोन और प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना किसी पूर्व अनुमति के ड्रोन उड़ाना सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई कि यदि निर्देश का तुरंत पालन नहीं किया गया, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी रूप से कठोर कार्रवाई की जाएगी।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मौके पर पहले से तैनात उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) की विशेष ड्रोन टीम भी तत्काल एक्शन मोड में आ गई। एटीएस के कमांडो और विशेषज्ञों ने आसमान में उड़ रहे उस संदिग्ध ड्रोन की हर एक गतिविधि पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी और उसकी घेराबंदी करने का प्रयास किया। जैसे ही पुलिस और सुरक्षा बलों की सरगर्मी बढ़ी, वैसे ही ड्रोन को और अधिक ऊंचाई पर ले जाया गया, ताकि उसे आसानी से पकड़ा न जा सके। इसके बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां लगातार उसकी उड़ान और लोकेशन पर तकनीकी नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल, स्थानीय पुलिस और तमाम खुफिया एजेंसियां मिलकर उस अज्ञात ड्रोन ऑपरेटर की पहचान सुनिश्चित करने में दिन-रात एक कर रही हैं। घटना स्थल के आसपास के इलाकों में स्थानीय लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है, इसके साथ ही डिजिटल और तकनीकी माध्यमों की मदद भी ली जा रही है ताकि ऑपरेटर का सुराग लगाया जा सके। इस पूरी जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आखिर यह ड्रोन कहां से ऑपरेट किया जा रहा था और क्या इसे उड़ाने के लिए जिला प्रशासन या पुलिस विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति ली गई थी या यह एक सोची-समझी सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश थी।
चूंकि मामला सीधे तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है, इसलिए तमाम सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, इस संवेदनशील मामले को लेकर अभी तक पुलिस अथवा जिला प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार बड़े अधिकारी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान या प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है, लेकिन भीतरखाने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है।


