सर्वदलीय बैठक: “भारत ‘दलाल देश’ नहीं”, विदेश मंत्री जयशंकर का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार; ऊर्जा संकट पर विपक्ष संतुष्ट

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत की रणनीति और सुरक्षा उपायों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक सकारात्मक मोड़ पर समाप्त हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विपक्ष के तमाम सवालों के जवाब दिए। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

​पाकिस्तान की मध्यस्थता पर तंज: “हम दलाल देश नहीं”

बैठक के दौरान जब सपा सांसद धर्मेंद्र यादव और कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने पाकिस्तान की भूमिका और उसके द्वारा मध्यस्थता की पेशकश पर सवाल किया, तो विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ की ‘वार्ता की मेजबानी’ वाली पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा, “हम पाकिस्तान की तरह ‘दलाल देश’ नहीं बन सकते।” उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान 1981 से ऐसी भूमिका निभाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन भारत अपनी स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति पर अडिग है।

ऊर्जा सुरक्षा: 60% बढ़ा घरेलू LPG उत्पादन

विपक्षी सदस्यों ने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के रास्ते होने वाली तेल और गैस आपूर्ति पर चिंता जताई। इस पर सरकार ने डेटा साझा करते हुए बताया देश में पेट्रोलियम और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों में से 4 सुरक्षित वापस आ चुके हैं और अन्य भी जल्द पहुँचेंगे।

4.25 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी

​खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों के मुद्दे पर सरकार ने बताया कि भारतीय दूतावास ‘मिशन मोड’ में काम कर रहे हैं। अब तक 4.25 लाख भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि हर नागरिक की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सरकार के जवाबों से संतुष्ट हुआ विपक्ष

​संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि लगभग दो घंटे चली इस चर्चा में विपक्ष के हर भ्रम को दूर कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “मुझे यह बताते हुए संतोष है कि विपक्ष के सभी साथियों ने संकट की इस घड़ी में सरकार के फैसलों का एकजुट होकर समर्थन करने का वादा किया है।”

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने पहले सरकार की विदेश नीति की आलोचना की थी, लेकिन विस्तृत चर्चा के बाद विपक्ष ने पश्चिम एशिया संकट से निपटने के सरकारी तरीके पर संतोष व्यक्त किया।