आगरा: राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन एक दौर था जब राजनेता वैचारिक लड़ाइयों के बीच भी मानवीय संवेदनाओं का सम्मान करना जानते थे। मगर, आज की सियासत में शायद संवेदनाएं दम तोड़ रही हैं। ऐसा ही एक हृदयविदारक और विवादित दृश्य आज ताजनगरी आगरा में देखने को मिला, जहाँ एक तरफ समाजवादी पार्टी के कुनबे में मातम पसरा था, तो दूसरी तरफ भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर नारेबाजी कर रहे थे।
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का असमय निधन हो गया है। आज जब उनके घर में कोहराम मचा हुआ था और अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर रखा गया था, ठीक उसी समय भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के विरोध में प्रदर्शन करने निकल पड़े।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस दौरान ‘अखिलेश यादव शर्म करो’ के नारे लगाकर माहौल को और गर्मा दिया।
विवाद की जड़: सांसद अजेंद्र सिंह लोधी का बयान
दरअसल, भाजपा का यह आक्रोश सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई कथित अभद्र भाषा को लेकर था। भाजपाई इस बात से बेहद आहत थे और अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे। हालांकि, प्रदर्शन का समय और संवेदनशीलता सवालों के घेरे में आ गई।
विदित हो दिवंगत प्रतीक यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के पुत्र व वर्तमान सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश के भाई थे। कल के कार्यक्रम निरस्त कर भाजपाई जब अपर्णा जो कि भाजपाई है कि प्रति अपनी संवेदना और वफादारी दिखा रहे थे चौबीस घंटे भी धैर्य न रख सके। संवेदना हो या धरना सभी का राजनैतिक मूल्य वसूलने की परिपाटी को आज फिर सत्ता पक्ष ने अंजाम दिया।
सफाई और सवाल
जब भाजपा कार्यकर्ताओं से इस बेवक्त प्रदर्शन पर सवाल किया गया, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह विरोध प्रदर्शन पहले 13 मई को होना तय था। प्रतीक यादव की मौत की खबर मिलने के बाद इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया और आज यानी 14 मई को आयोजित किया गया।
जंहा पारिवारिक विवादों और अफवाहों के बाबजूद जब अखिलेश यादव परिवार के साथ खड़े नजर आए वहीं भाजपाई मौके की नजाकत को भांपने में पिछड़ गए। भाजपा का ये विरोध संवेदनाओं के बीच एक खराब छवि छोड़ गया
लेकिन यहाँ बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या राजनीति इतनी निष्ठुर हो गई है कि शोक के क्षणों का भी इंतजार नहीं किया जा सकता? क्या यह प्रदर्शन कुछ दिनों बाद नहीं हो सकता था? जिस घर से अर्थी उठने वाली हो, उस घर के मुखिया के खिलाफ ‘शर्म करो’ के नारे लगाना राजनीति के गिरते स्तर और खत्म होती मानवीय संवेदनाओं की ओर इशारा करता है।


