अखिलेश यादव का मोदी सरकार पर सीधा वार: जब गिनती ही गलत, तो महिला आरक्षण कैसे होगा सही?

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार के महिला आरक्षण बिल को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए साफ कहा कि बिना सटीक आंकड़ों और नई जनगणना के महिला आरक्षण की बात करना महज एक राजनीतिक स्टंट है। अखिलेश यादव के मुताबिक, जिस नीति की बुनियाद ही कमजोर और गलत गणित पर आधारित हो, वह महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार कभी नहीं दिला सकती।

गणित बनाम अनुमान: आंकड़ों पर छिड़ी रार

अखिलेश यादव ने अपने बयान में तर्क दिया कि महिला आरक्षण पूरी तरह से ठोस गणित का विषय है। उन्होंने कहा, “जब आरक्षण का आधार कुल सीटों का एक-तिहाई तय किया जाना है, तो इसके लिए ‘हवा-हवाई’ बातों के बजाय पुख्ता डेटा की जरूरत होती है।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर महिलाओं की हिस्सेदारी तय करनी है, तो उसके लिए 2011 की पुरानी जनगणना के आंकड़ों का सहारा क्यों लिया जा रहा है? उनके अनुसार, पिछले 15 वर्षों में जनसंख्या का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।

​”दोषपूर्ण भूमि पर नहीं उगेगी फसल”

सपा प्रमुख ने कड़े शब्दों में कहा कि किसी भी नीति की सफलता उसकी नीव पर निर्भर करती है। उन्होंने मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा, “जब भूमि में ही दोष होगा, तो वहां सच्ची फसल कैसे उग सकती है?” अखिलेश का सीधा आरोप है कि सरकार महिलाओं की सही गिनती कराने से भाग रही है। उन्होंने मांग की कि सबसे पहले देश में नई जातिगत और सामान्य जनगणना कराई जानी चाहिए, ताकि हर वर्ग की महिलाओं को उनकी आबादी के अनुपात में हक मिल सके।

​भाजपा पर ‘छलावे’ का आरोप

अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर होते हुए कहा कि यह बिल महिलाओं के साथ किया गया एक बड़ा ‘छलावा’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बिना जनगणना और बिना पिछड़ी व दलित महिलाओं के कोटे (OBC कोटा) के इस बिल को थोपा गया, तो समाजवादी पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी।

​अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक जनगणना की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक महिला आरक्षण पर किसी भी तरह की बहस बेमानी है। उनके इस बयान ने उत्तर प्रदेश समेत देश की राजनीति में एक नई चर्चा छेड़ दी है।