सिर्फ दाम बढ़ रहे, सप्लाई नहीं… बिजली संकट पर अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है, लेकिन इस जानलेवा गर्मी के बीच बिजली कटौती ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बिजली की किल्लत से परेशान राजधानी लखनऊ से लेकर ग्रामीण अंचलों तक हाहाकार मचा है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोग अब सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराने को मजबूर हैं।

लखनऊ की सड़कों पर फूटा गुस्सा

राजधानी लखनऊ के कई इलाकों में बिजली की अघोषित कटौती ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। गुरुवार सुबह तेलीबाग, मवैया और उतरेटिया समेत कई क्षेत्रों में स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग की लापरवाही के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भीषण गर्मी में घंटों बिजली गायब रहने से जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है, जबकि विभाग और सरकार स्थिति सुधारने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं।

गांवों में खेती और सिंचाई पर गहरा संकट

शहरी क्षेत्रों से कहीं अधिक विकराल स्थिति गाँवों में है। लंबी बिजली कटौती ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बिजली की भारी किल्लत के कारण फसलों की सिंचाई का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश है। खेती के लिए पर्याप्त बिजली न मिलने से फसलों के सूखने का डर किसानों को सता रहा है, जो आने वाले समय में आर्थिक संकट का कारण भी बन सकता है।

अखिलेश यादव का सरकार पर तीखा प्रहार

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन का एक वीडियो साझा करते हुए सरकार की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं।

अखिलेश ने व्यंग्य करते हुए लिखा ​”बिजली के नये प्लांट लगाना तो आपके बस में था नहीं, न ही आपकी तंग सोच में। मुंह से ये कह ही देते ‘3×660 SUPERCRITICAL THERMAL POWER PLANT’ तो गर्मी में झुलसते प्रदेशवासियों को सुनकर ही थोड़ी राहत मिल जाती। भाजपा के कुराज में उप्र में बिजली की सिर्फ़ ‘मांग’ बढ़ रही है या ‘दाम’ बढ़ रहे हैं, सप्लाई-आपूर्ति नहीं।”

यह हमला सीधे तौर पर सरकार की बिजली परियोजनाओं और आपूर्ति प्रबंधन की विफलता को इंगित करता है।

सरकार के दावे बनाम जमीनी हकीकत

​एक तरफ सरकार बिजली आपूर्ति को लेकर तमाम दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। गर्मी का पारा लगातार ऊपर जा रहा है और बिजली की मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश में बिजली का संकट और अधिक उग्र रूप ले सकता है।