अखिलेश यादव का सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पर तीखा तंज: बोले- ‘स्टूल से कुर्सी पर तो बैठा दिया, पर हाथ उठाने की इजाजत नहीं दी’

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में राज्यसभा चुनाव के नामांकन के दौरान सामने आए एक वीडियो को लेकर घमासान मच गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर एक साथ जोरदार हमला बोला है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो शेयर करते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के कथित अपमान का गंभीर आरोप लगाया है।

वीडियो में क्या है पूरा मामला?

अखिलेश यादव द्वारा शेयर किए गए वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री—केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक—तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी के सभी उम्मीदवार नजर आ रहे हैं। वीडियो में सभी नेता अपनी जीत का दावा करते हुए ‘विक्ट्री साइन’ (Victory Sign) दिखा रहे हैं। इसी दौरान, जब कैमरे के सामने तस्वीरें ली जा रही थीं, तब मुख्यमंत्री योगी मजाकिया या अन्य अंदाज में अपने बगल में बैठे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का हाथ नीचे कर देते हैं। इसी क्लिप को आधार बनाकर अखिलेश यादव ने सत्ता पक्ष पर करारा तंज कसा है।

​’हाथ उठाने की नहीं दी गई इजाजत’

इस वीडियो को साझा करते हुए अखिलेश यादव ने लिखा, “गौर से देखिए ‘पीडीए समाज’ का होने के नाते ही मुख्यमंत्री जी भाजपा के अपने ही उप मुख्यमंत्री जी का अपमान कर रहे हैं। आज उप मुख्यमंत्री जी को किसी तरह ‘स्टूल’ की जगह कुर्सी पर तो बैठा दिया गया, लेकिन हाथ उठाने की इजाज़त नहीं दी गई।”

​सपा प्रमुख ने आगे सवाल उठाते हुए कहा कि ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज यह पूछ रहा है कि मुख्यमंत्री जी को आखिर किसी अन्य व्यक्ति के हाथ उठाने पर कोई ऐतराज़ क्यों नहीं हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि सरेआम किसी का हाथ नीचे गिराना और उसे रोकना जानबूझकर बेइज्जत करने का कुकृत्य है।

​’5 सेकंड के धमकी भरे बयान का उदाहरण’

अखिलेश यादव ने अपने बयान में आगे कहा कि मुख्यमंत्री अच्छी तरह जानते थे कि उस वक्त वीडियो रिकॉर्ड हो रहा है और पूरी दुनिया इसे देखेगी, इसलिए ऐसा जानबूझकर किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने हालिया ‘5 सेकंड’ के जिस धमकी भरे वीडियो में यह कहा था कि ‘देखिएगा पीडीए का क्या हाल होगा’, यह घटना उसी मानसिकता और उसी बात का एक जीता-जागता उदाहरण है। इस तीखे हमले के बाद से उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी और तेज हो गई है।