आगरा (लालगढ़ी): दूषित पानी से होने वाली बीमारियों और गिरते भूजल स्तर की चुनौती से निपटने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के समाज कार्य (MSW) विभाग ने एक अनूठी पहल की है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी के संरक्षण और डॉ. राजीव वर्मा के कुशल मार्गदर्शन में ग्राम लालगढ़ी में “जल परीक्षण एवं जल संरक्षण” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। छात्रों ने न केवल जल बचाने की अपील की, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से पानी की शुद्धता की जांच कर ग्रामीणों को हैरान कर दिया।
घर-घर पहुंचे छात्र, परखा पानी का ‘PPM’
इस अभियान के तहत मनीषा राणा, पवन कुमार, अभय सिसोदिया और अजीत परमार सहित छात्रों की टीम ने गांव के अलग-अलग हिस्सों से पानी के नमूने (Samples) इकट्ठे किए। आधुनिक किट के जरिए छात्रों ने ग्रामीणों के सामने पानी के PPM (Parts Per Million) स्तर की जांच की। उन्होंने विस्तार से समझाया कि पीने योग्य पानी का मानक क्या होना चाहिए और मानक से अधिक या कम PPM वाला पानी पाचन तंत्र, त्वचा और हड्डियों को कैसे नुकसान पहुँचा सकता है।
बीमारियों से बचाव और संरक्षण की सीख
जागरूकता के दौरान छात्रों ने स्वच्छ जल के उपयोग से स्वस्थ जीवन जीने के नुस्खे साझा किए। साथ ही, भविष्य के संकट को देखते हुए जल संरक्षण के प्रभावी तरीके बताए गए। ग्रामीणों को सिखाया गया कि कैसे वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और पानी के सीमित उपयोग से वे अपने गांव के जल स्तर को सुधार सकते हैं।
इन युवा योद्धाओं ने संभाली कमान
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रज्ञा वर्मा, अनंत वर्मा, मोहित कुमार, मोहित बघेल, पूजा सिंह, सचित कुमार, अमन शर्मा, आदित्य सिंह, ख्याति सिंह और गजेंद्र का विशेष योगदान रहा। युवाओं की इस टोली ने न केवल तकनीकी जानकारी दी, बल्कि ग्रामीणों को जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने की शपथ भी दिलाई।
लालगढ़ी के निवासियों ने विश्वविद्यालय की इस वैज्ञानिक और सामाजिक पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पहली बार उन्हें अपने घर के पानी की गुणवत्ता के बारे में इतनी सटीक जानकारी मिली है।

