आगरा: स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर कम्युनिस्ट नेता महादेव नारायण टंडन की 23वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ताजनगरी में ‘जनतंत्र में शिक्षा शास्त्र’ विषय पर एक गंभीर वैचारिक विमर्श का आयोजन किया गया। पचकुइयां स्थित माथुर वैश्य सभागार में जुटे बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों ने एक सुर में कहा कि मौजूदा दौर में शिक्षा को महज ‘डिग्री और रोजगार’ तक सीमित कर देना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। वक्ताओं ने जोर दिया कि शिक्षा का असली मकसद रट्टू तोते पैदा करना नहीं, बल्कि सवाल पूछने वाले जागरूक नागरिक तैयार करना है।
महापुरुषों को नमन और स्मृतियों का संगम
कार्यक्रम का आगाज कामरेड महादेव नारायण टंडन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस मौके पर एसएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. जी.यू. कुरैशी, मुख्य वक्ता अपूर्वानंद, कामरेड पूरन सिंह और भावना जितेंद्र रघुवंशी ने उन्हें याद किया। इस आयोजन की एक खास कड़ी दिल्ली से आए बलराम शर्मा रहे, जिनके पास कामरेड टंडन द्वारा लिया गया महात्मा गांधी का वह दुर्लभ साक्षात्कार आज भी सुरक्षित है, जो इतिहास की एक अनमोल धरोहर है।
शिक्षा की तटस्थता पर बड़ा सवाल
मुख्य वक्ता अपूर्वानंद ने अपने संबोधन में शिक्षा के गिरते स्तर और रटने की प्रवृत्ति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “शिक्षा कभी तटस्थ नहीं होती; हमारी किताबें और पाठ्यक्रम किसी न किसी विचारधारा की परछाई होते हैं। इसलिए यह समझना अनिवार्य है कि हम अपनी भावी पीढ़ी को क्या और क्यों पढ़ा रहे हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि जब तक छात्रों को अपनी भाषा में सोचने और अभिव्यक्त करने की आजादी नहीं मिलेगी, तब तक ज्ञान का वास्तविक प्रसार संभव नहीं है।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए ‘विवेक’ जरूरी
विषय प्रवर्तन करते हुए जे.एन. टंडन ने कहा कि जनतंत्र की सफलता समावेशी और नैतिक शिक्षा पर टिकी है। शिक्षा का कार्य केवल सूचनाएं बटोरना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर सहिष्णुता और विविधता को स्वीकार करने का विवेक पैदा करना है। गोष्ठी में यह बात प्रमुखता से उभरी कि शिक्षक केवल सूचना देने वाला यंत्र नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और संवादकर्ता होना चाहिए जो छात्रों को सामाजिक न्याय और समानता का पाठ पढ़ा सके।
बुद्धिजीवियों का समागम
समारोह के अंत में मुख्य अतिथि अपूर्वानंद को ब्रिजेंद्र नारायण टंडन ने स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन हरीश चिमटी ने किया और आभार प्रदर्शन कामरेड पूरन सिंह ने किया। इस बौद्धिक समागम में डॉ. वी.आर. सेंगर, डॉ. राकेश भाटिया, डॉ. अजय कालरा, डॉ. सुधीर धाकरे, डॉ. विजय कत्याल और राजीव सक्सेना सहित शहर के तमाम गणमान्य डॉक्टर, प्रोफेसर और समाजसेवी उपस्थित रहे।

