आगरा मेट्रो की बड़ी छलांग: मन:कामेश्वर से RBS कॉलेज तक बिछ गई पटरी, अब दौड़ेगी ट्रायल ट्रेन

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​आगरा: ताजनगरी में विश्वस्तरीय परिवहन सेवा की दिशा में उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा के बीच बन रहे प्रथम कॉरिडोर के भूमिगत भाग में मन:कामेश्वर स्टेशन से आरबीएस कॉलेज तक अप और डाउन, दोनों लाइनों में ट्रैक बिछाने का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। अप लाइन पर पहले ही ट्रायल किया जा चुका है, और अब डाउन लाइन भी पूरी तरह तैयार है, जिस पर जल्द ही ट्रायल रन शुरू किया जाएगा।

​12 किलोमीटर का सफर तय

मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, आईएसबीटी से मन:कामेश्वर के बीच अप और डाउन ट्रैक को मिलाकर लगभग 12 किलोमीटर लंबा ट्रैक बिछाया जा चुका है। ट्रैक बिछाने के साथ-साथ ‘थर्ड रेल’ (बिजली आपूर्ति प्रणाली) और सिग्नलिंग का काम भी अपने अंतिम चरण में है। इसके अतिरिक्त, आईएसबीटी से सिकंदरा के बीच एलिवेटेड खंड पर भी सिविल कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।

​कैसे बिछाया गया टनल में ट्रैक? (तकनीकी विशेषता)

भूमिगत टनल में ट्रैक बिछाना एक जटिल प्रक्रिया है। टनल का आकार गोल होने के कारण सीधे पटरी बिछाना संभव नहीं होता, इसलिए सबसे पहले ट्रैक स्लैब की कास्टिंग की जाती है। इसके बाद समतल ट्रैक स्लैब पर बैलास्टलेस ट्रैक (बिना गिट्टी वाला ट्रैक) बिछाया जाता है। यह ट्रैक पारंपरिक रेलवे ट्रैक की तुलना में अधिक मजबूत होता है और इसमें रखरखाव (Maintenance) की आवश्यकता भी बहुत कम होती है।

हेड हार्डेंड रेल: मजबूती का नया मानक

आगरा मेट्रो में ‘हेड हार्डेंड रेल’ का उपयोग किया गया है। चूंकि मेट्रो ट्रेनें औसतन हर पांच मिनट में चलती हैं और बार-बार ब्रेक लगने व तेजी से स्पीड पकड़ने के कारण पटरियों पर अधिक घर्षण (Friction) होता है। सामान्य पटरियों में क्रैक या घिसने का डर रहता है, लेकिन हेड हार्डेंड पटरियां अपनी मजबूती के कारण इन चुनौतियों को आसानी से झेल लेती हैं।

ऑटोमैटिक वेल्डिंग से बनी ‘लॉन्ग वेल्डेड रेल’

ट्रैक की स्मूथनेस बनाए रखने के लिए ऑटोमैटिक ट्रैक वेल्डिंग मशीन का उपयोग किया गया है। क्रेन की मदद से इस मशीन को शाफ्ट के जरिए टनल के अंदर पहुँचाया गया, जहाँ पटरियों के छोटे टुकड़ों को वेल्डिंग के माध्यम से जोड़कर लॉन्ग वेल्डेड रेल तैयार की गई। इससे यात्रियों को सफर के दौरान झटके महसूस नहीं होंगे और शोर भी कम होगा।

​दूसरे कॉरिडोर पर भी नजर

प्रथम कॉरिडोर के साथ-साथ, आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बनने वाले दूसरे कॉरिडोर का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। यूपीएमआरसी का लक्ष्य है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आगरा के निवासियों को एक सुरक्षित, तेज और प्रदूषण मुक्त यातायात प्रणाली समर्पित की जा सके।