आगरा। हिंदी दिवस के पावन अवसर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआई) एवं स्वास्तिक हैंडराइटिंग वेलफेयर ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवाड़ा उत्सव के अंतर्गत एक रोमांचक त्वरित भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के महत्व, राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय चेतना, पर्यावरण संरक्षण, हिंदी और विज्ञान, शोध के नवीन आयामों के साथ-साथ संस्कृत से लेकर आज तक के हिंदी के गौरवशाली इतिहास पर अपने बेहद प्रभावशाली विचार रखे। कार्यक्रम में निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ. मोहिनी दयाल और डॉ. रमा ने निभाई।
प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. अमित कुमार सिंह ने जानकारी दी कि आज के इस आयोजन में विश्वविद्यालय की आवासीय इकाई के साथ-साथ संबद्ध महाविद्यालयों के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण यह था कि प्रतिभागियों को मंच पर ही तत्काल (ऑन-द-स्पॉट) विषय प्रदान किया गया, जिस पर उन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने विचार बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने साहित्य, शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्र निर्माण और समसामयिक विषयों पर अपनी बेहतरीन पकड़ दिखाई।
प्रतिभागियों का मूल्यांकन उनकी विषय-वस्तु, अभिव्यक्ति-कौशल, भाषा-शुद्धता, तर्कपूर्ण प्रस्तुति और समय-सीमा के आधार पर किया गया।
इन्होंने मारी बाजी, रूसी छात्र ने बांधा समां
कड़े मुकाबले के बाद पीजीडीएमसी, केएमआई के छात्र योगेश शर्मा ने प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं, एम.ए. हिंदी, केएमआई के लोकेंद्र सिंह ने द्वितीय स्थान तथा बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय की बीए की छात्रा अंजली शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस त्वरित भाषण प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह रही कि रूस के छात्र तीमाफ़े त्सेरसेव ने भी इसमें सहभागिता कर हिंदी भाषा के प्रति अपनी गहरी रुचि और प्रतिभा का अनूठा परिचय दिया। उन्होंने मंच पर न केवल अपनी बात रखी, बल्कि हिंदी में एक खूबसूरत गाना गाकर वहां मौजूद सभी अतिथियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों का दिल जीत लिया। उनकी सहज अभिव्यक्ति और हिंदी प्रेम ने इस पूरे कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।
क्या बोले विद्यापीठ के निदेशक?
इस अवसर पर विद्यापीठ के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी केवल आपसी संवाद का माध्यम भर नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा की सच्ची संवाहक भाषा है। विद्यार्थियों के भीतर हिंदी के प्रति रुझान बढ़ाने और उन्हें अपने विचार प्रभावी तरीके से रखने के लिए प्रेरित करने में ऐसी प्रतियोगिताएं मील का पत्थर साबित होती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि त्वरित भाषण से छात्रों में त्वरित चिंतन, तार्किक विश्लेषण, भाषिक दक्षता, आत्मविश्वास और बेहतरीन मंचीय अभिव्यक्ति जैसे गुणों का विकास होता है।
कार्यक्रम के अंत में समन्वयक डॉ. वर्षा रानी ने निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर, निर्णायक मंडल के सदस्यों, सभी शिक्षकगणों, कर्मचारियों और प्रतिभागी विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं की यह ऊर्जावान सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि आने वाले समय में भी इस तरह की सार्थक गतिविधियां युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर आयोजित की जाती रहेंगी। कार्यक्रम के दौरान डॉ. पल्लवी आर्य, डॉ. संदीप शर्मा, कंचन, प्रीति कुमारी और उपेंद्र पचौरी की विशेष उपस्थिति दर्ज की गई।
