आगरा: ताजनगरी के हाई-प्रोफाइल आईपीएल सट्टा कांड में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। फतेहाबाद रोड स्थित ‘होटल हावर्ड पार्क प्लाजा’ के कमरा नंबर 318 से गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई है। सीजेएम शारिब अली की अदालत के आदेश के बाद गुरुवार देर शाम सभी आरोपियों को जेल से रिहा कर दिया गया। हालांकि, सट्टेबाजी के इस विशाल नेटवर्क के असली ‘आका’ अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
होटल में रेड और गिरफ्तारी का सिलसिला
पुलिस ने आईपीएल मैच पर सट्टा लगाने की सूचना पर होटल में छापेमारी कर सुनील धाकड़, अनिल खेम्यानी, मनीष मयानी और राहुल मुद्गल को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। बाद में राहुल के बयान के आधार पर पीयूष शर्मा को भी पुलिस ने दबोचा था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने इन गिरफ्तारियों को फर्जी बताते हुए तर्क दिया कि पुलिस ने पूछताछ के बहाने बुलाकर रंजिशन फंसाया है। आरोपी पीयूष शर्मा ने खुद को पत्रकार बताकर अपनी गिरफ्तारी को साजिश करार दिया।
फरार ‘बड़े नामों’ की तलाश में खाक छान रही पुलिस
भले ही मोहरे जेल से बाहर आ गए हों, लेकिन इस सिंडिकेट को चलाने वाले मुख्य संचालक अब भी फरार हैं। पुलिस रिकॉर्ड में राधे मल्होत्रा, अन्नी पंडित, टोनी सिंधी, राजीव चोपड़ा और संजय कालिया जैसे नाम शामिल हैं, जिनकी तलाश में आगरा पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। शाहगंज क्षेत्र में सक्रिय सूदखोरों और ओपी लाला गैंग से जुड़े हिस्ट्रीशीटरों के इस सट्टा नेटवर्क में कनेक्शन की भी गहनता से जांच की जा रही है।
संपत्ति जब्ती और कड़े कानूनी प्रहार की तैयारी
पुलिस अब इस पूरे मामले को महज सट्टेबाजी नहीं, बल्कि एक ‘संगठित अपराध’ (Organized Crime) के रूप में देख रही है। सूत्रों की मानें तो पुलिस वित्तीय लेनदेन और सट्टे के बीच सूदखोरी के गठजोड़ को खंगाल रही है। आने वाले समय में फरार आरोपियों पर और अधिक गंभीर धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। साथ ही, बीएनएसएस (BNSS) की धारा 107 के तहत फरार अपराधियों की संपत्ति जब्ती और कुर्की जैसी सख्त कार्रवाई की भी संभावना जताई जा रही है।


