आगरा: ताजनगरी के अधिवक्ताओं ने सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक नई हुंकार भरी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (अनुसूचित जाति विभाग) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम के दिशा-निर्देशन में आयोजित एक विशेष बैठक में राजनीति और समाज के हाशिए पर खड़े लोगों को विधिक सुरक्षा देने पर गहन मंथन हुआ। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दलितों और वंचितों के अधिकारों पर होने वाले प्रहारों को रोकने के लिए जिला स्तर पर एक सुदृढ़ ‘लीगल सेल’ का गठन करना रहा।
संविधान और श्रम कानूनों की रक्षा पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एआईसीसी (SC विभाग) की राष्ट्रीय समन्वयक एडवोकेट मेघा सेहरा ने कांग्रेस की समावेशी विचारधारा को रेखांकित किया। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के कालजयी योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि उनके द्वारा निर्मित श्रम कानून और संवैधानिक कवच आज भी भारतीय समाज की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने अधिवक्ताओं का आह्वान किया कि स्वतंत्रता संग्राम की तरह ही वर्तमान दौर में भी समाज को नई दिशा देने की जिम्मेदारी वकीलों के कंधों पर है।
अंतिम पायदान तक पहुँचेगा न्याय
एडवोकेट सेहरा ने वर्तमान सामाजिक परिवेश में बढ़ते भेदभाव और विद्वेष पर चिंता जताते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब अधिवक्ताओं को एकजुट होकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस और एससी विभाग मिलकर एक ऐसा राष्ट्रव्यापी कानूनी ढांचा तैयार कर रहा है, जिससे समाज के सबसे कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को बिना किसी विलंब के न्याय मिल सके।
राहुल गांधी के विजन और नेतृत्व पर भरोसा
बैठक के दौरान वक्ताओं ने राहुल गांधी के समावेशी दृष्टिकोण और राजेंद्र पाल गौतम के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे क्रांतिकारी मुद्दों को उठाने वाली कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जो दलित समाज के हितों की सच्ची पहरेदार है।
बैठक में उपस्थित अधिवक्ताओं ने एक सुर में संकल्प लिया कि दलित समाज के साथ होने वाले किसी भी अन्याय के खिलाफ वे संगठित होकर न्यायालय से लेकर सड़क तक विधिक लड़ाई लड़ेंगे। इस दौरान ताजनगरी के तमाम वरिष्ठ एवं युवा अधिवक्ता मौजूद रहे, जिन्होंने इस मुहिम को जमीनी स्तर पर उतारने का समर्थन किया।

