मथुरा (गोवर्धन): भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के तीन दिवसीय ऐतिहासिक ब्रज प्रवास का शनिवार को आध्यात्मिक समापन हुआ। अपने दौरे के अंतिम दिन महामहिम गिरिराज महाराज की नगरी गोवर्धन पहुंचीं, जहाँ उन्होंने भक्ति और श्रद्धा की एक अनूठी मिसाल पेश की। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच राष्ट्रपति नंगे पांव गोवर्धन की सड़कों पर चलती नजर आईं, जिसे देख स्थानीय निवासी और श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
दानघाटी मंदिर में दुग्धाभिषेक और विशेष पूजा
शनिवार तड़के राष्ट्रपति का काफिला गोवर्धन के प्रसिद्ध दानघाटी मंदिर पहुंचा। यहाँ सेवायतों और वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार के साथ उनका पारंपरिक स्वागत किया। राष्ट्रपति ने चांदी के लोटे से गिरिराज जी का जलाभिषेक किया और फिर दूध, दही, घी, शहद व शक्कर के मिश्रण (पंचामृत) से गिरिराज महाराज का दुग्धाभिषेक कर देश की सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। इस दौरान उन्होंने दंडवत प्रणाम कर ब्रज की इस पावन धरा को नमन किया।
गोल्फ कार्ट से सप्तकोषीय परिक्रमा
मंदिर में पूजन के पश्चात राष्ट्रपति ने गोल्फ कार्ट के माध्यम से सप्तकोषीय परिक्रमा की। परिक्रमा मार्ग को दुल्हन की तरह सजाया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर एनएसजी कमांडो और भारी पुलिस बल तैनात रहा, लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रपति ने हाथ जोड़कर सड़कों और छतों पर खड़े लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। उनके साथ उनके परिवार के सदस्य भी इस भक्तिमय यात्रा में शामिल रहे।
तीन दिवसीय यात्रा: अयोध्या से गोवर्धन तक का सफर
राष्ट्रपति का यह दौरा 19 मार्च को अयोध्या में रामलला के दर्शन के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद:
वृंदावन प्रवास: 20 मार्च को उन्होंने श्रीहित राधा केली कुंज में संत प्रेमानंद महाराज से आध्यात्मिक संवाद किया।
सेवा कार्य: उन्होंने नीब करौरी बाबा की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और वात्सल्य ग्राम में साध्वी ऋतम्भरा (दीदी मां) के प्रकल्पों का अवलोकन किया।
स्वास्थ्य सौगात: रामकृष्ण मिशन अस्पताल में नवनिर्मित कैंसर चिकित्सा खंड का उद्घाटन कर ब्रजवासियों को बड़ी राहत दी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और जन-उत्साह
राष्ट्रपति के आगमन को लेकर मथुरा-गोवर्धन मार्ग पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम रहे। जिला प्रशासन और पुलिस बल ने चप्पे-चप्पे पर पहरा दिया। कोहरे के कारण दृश्यता कम होने के बावजूद स्थानीय लोगों का उत्साह चरम पर था।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल एक राजकीय यात्रा थी, बल्कि इसने ब्रज की संस्कृति और आध्यात्मिकता को वैश्विक पटल पर एक नई गरिमा प्रदान की है।

