आगरा। उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी और शिव भक्ति के रंग में सराबोर आगरा में सोमवार को सनातन आस्था का एक अद्भुत और विहंगम नजारा देखने को मिला। शिव भक्ति की अकल्पनीय मिसाल पेश करते हुए देश के 12 ज्योतिर्लिंगों की अत्यंत कठिन पैदल यात्रा पर निकले गुजरात (अहमदाबाद) के अद्वितीय दंपति नीलेश राजानी और सोनिया राजानी का आगरा आगमन पर भव्य स्वागत किया गया।
राष्ट्रीय सिंधी महासंघ द्वारा ग्वालियर रोड पर इस श्रद्धालु दंपति के ऊपर जमकर पुष्प वर्षा की गई और उनका आत्मीय अभिनंदन किया गया। इसके उपरांत, जयपुर हाउस स्थित ‘जय झूलेलाल भवन’ में एक भव्य और गरिमामयी स्वागत समारोह का आयोजन हुआ।
इस पूरे मांगलिक कार्यक्रम के दौरान पंडाल बाबा महाकाल, भगवान शिव-पार्वती और आराध्य देव भगवान झूलेलाल के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा और पूरा वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।
धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, सनातन संस्कृति और कठिन तपस्या का जीवंत उदाहरण
यह ऐतिहासिक पदयात्रा केवल एक सामान्य धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह इस अद्वितीय दंपति के अटूट संकल्प, कठिन तपस्या, शारीरिक सहनशीलता और सनातन संस्कृति के प्रति उनकी अगाध और जीवंत आस्था का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।
जयपुर हाउस में आयोजित अभिनंदन समारोह में श्रद्धा, भक्ति और निस्वार्थ सेवा का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जहां सिंधी समाज सहित तमाम उपस्थित समाजजनों ने राजानी दंपति के इस अदम्य साहस, अद्वितीय संकल्प और निश्छल भक्ति भाव को दोनों हाथ जोड़कर नमन किया।
अहमदाबाद से शुरू हुई थी यात्रा, 11 राज्यों की दूरी तय कर चुके हैं नीलेश-सोनिया
अभिनंदन समारोह के दौरान राष्ट्रीय सिंधी महासंघ के संरक्षक जितेन्द्र त्रिलोकानी ने गौरवपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि नीलेश राजानी और सोनिया राजानी संपूर्ण भारत के पहले ऐसे वैवाहिक दंपति हैं, जो एक साथ देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की कगार-कठिन पैदल पदयात्रा पर निकले हैं। इस पावन और आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ बीते वर्ष 23 जुलाई को अहमदाबाद (गुजरात) की पवित्र धरती से हुआ था। अपनी अटूट इच्छाशक्ति के बल पर यह श्रद्धालु दंपति अब तक भारत के 11 राज्यों की अत्यंत दुर्गम और कठिन पैदल यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर चुका है।
8 ज्योतिर्लिंग और 5 शक्तिपीठों की चौखट पर टेक चुके हैं माथा, सिंधी समाज बना संबल
अपनी इस निरंतर जारी यात्रा के दौरान नीलेश और सोनिया अब तक देश के 8 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और 5 सिद्ध शक्तिपीठों के गर्भगृह में पहुंचकर श्रद्धापूर्वक दर्शन कर चुके हैं और वहां माथा टेक चुके हैं। इस लंबी यात्रा की सबसे विशेष और भावुक बात यह रही है कि पूरे देश में हर 30 से 50 किलोमीटर के अंतराल पर देश के विभिन्न कोनों में रहने वाले सिंधी समाज के परिवारों द्वारा इस अनूठे दंपति के रहने, भोजन, उत्तम स्वास्थ्य सेवा और संपूर्ण सहयोग की जिम्मेदारी उठाई जा रही है। समाज के इसी अपनत्व और सेवा भाव के कारण यह कठिन आध्यात्मिक यात्रा इस दंपति के लिए बेहद सुगम, सुरक्षित और भावनात्मक रूप से समृद्ध बनती जा रही है।
झाड़-झंखाड़, कठिन और विपरीत मौसम, चिलचिलाती धूप, लंबी दूरियों की थकान और मार्ग में आने वाली अनेक भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद इस दंपति ने कभी अपने कदम पीछे नहीं खींचे। उन्होंने हर सांसारिक बाधा को पीछे छोड़कर केवल अपनी अटूट श्रद्धा और धार्मिक संकल्प को सदैव आगे रखा है।
मौसम वैज्ञानिकों और यात्रा के ब्लूप्रिंट के अनुसार, अनुमान लगाया जा रहा है कि यह महान आध्यात्मिक यात्रा अभी लगभग 5 महीने और निरंतर चलेगी। देश भर के पूज्य संत-महात्माओं का दैवीय आशीर्वाद और सिंधी समाज का निरंतर मिल रहा संबल इस दंपति को प्रतिदिन सैकड़ों किलोमीटर चलने की असीम ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
यह यात्रा अब केवल किसी एक परिवार की व्यक्तिगत भक्ति तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह संपूर्ण सनातन संस्कृति की जीवंतता, निस्वार्थ सेवा भाव और राष्ट्रव्यापी सामाजिक एकता का एक अत्यंत प्रेरक और जीवंत प्रतीक बन चुकी है।
समारोह में ये गणमान्य रहे उपस्थित
इस भव्य अभिनंदन कार्यक्रम का अत्यंत कुशल और सुंदर संचालन मनोहर लाल हंस द्वारा किया गया, जबकि मुख्य समारोह की अध्यक्षता महेश कुमार सोनी ने की। इस पावन और गौरवशाली अवसर पर चंद्र प्रकाश सोनी, झूलेलाल भवन के सम्मानित ट्रस्टी शोभाराम पुरुसनानी, जयरामदास होतचंदानी, हीरालाल त्रिलोकानी, विपिन करीरा, रामचंद्र हंसानी, खेमचंद तेजनी, राजकुमार हंसानी, राजू खेमानी, अर्पित चित्रांश, अर्पित त्रिलोकानी सहित सिंधी समाज और आगरा शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, प्रबुद्ध वर्ग और भारी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।


