पेपर लीक मामले में आंदोलनकारी छात्रों को गटर जेनरेशन बताने पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत के विरुद्ध कोर्ट में परिवाद दायर, 5 अगस्त को होगी सुनवाई

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आगरा। पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी करने के मामले में भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस बयान से आहत होकर राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने आगरा की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में सांसद कंगना रनौत के विरुद्ध परिवाद दायर किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सुनवाई के लिए 5 अगस्त 2026 की तिथि निर्धारित की है।

​क्या है पूरा मामला?

अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि देश में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से हताश लाखों छात्र-छात्राओं ने अपने भविष्य को लेकर चिंतित होकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया था। आरोप है कि 20 जुलाई 2026 को इन छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बर लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए और कथित तौर पर कुछ की मृत्यु की खबरें भी सामने आईं।

​कंगना रनौत की टिप्पणी पर बढ़ा आक्रोश

परिवाद में कहा गया है कि जब विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं द्वारा छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई गई और केंद्र सरकार ने दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया, तब सांसद कंगना रनौत ने 27 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) पर आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ बेहद अपमानजनक टिप्पणी की। उन्होंने छात्रों को ‘गटर जेनरेशन’ (Gutter Generation) बताते हुए कहा था कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इतना ‘भद्दापन’ और ‘गंदगी’ नहीं देखी। उनके इस बयान से देश भर के छात्र और उनके अभिभावक गहरे आक्रोश में हैं।

​संविधान के उल्लंघन का आरोप

अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने परिवाद में तर्क दिया कि कंगना रनौत का यह बयान न केवल छात्रों के मनोबल को गिराने वाला है, बल्कि संविधान के मूल कर्तव्यों का भी सीधा उल्लंघन है। इससे संसद और देश की गरिमा को ठेस पहुंची है। परिवादी का कहना है कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर न्यू आगरा थाना और पुलिस कमिश्नर को भी शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, रामदत्त दिवाकर, सुमंत चतुर्वेदी, बी.एस. फौजदार और प्रीति कुमारी समेत कई वकीलों ने प्रभावी पैरवी की। अब सभी की निगाहें 5 अगस्त को होने वाली कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।