अलीगढ़। नवरात्रि के दौरान देशभर में मां दुर्गा की उपासना के साथ नारीशक्ति के सम्मान की बात भी प्रमुखता से होती है। इसी बीच अलीगढ़ से नोएडा के बीच चलने वाली रोडवेज बस की कमान संभाल रहीं सोनू मलान महिलाओं की आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के रूप में कार्यरत सोनू रोजाना सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करती हैं। उनका काम यह दिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के दम पर महिलाएं उन क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना सकती हैं, जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों का कार्यक्षेत्र माना जाता रहा है।
सोनू मलान प्रतिदिन लगभग 540 किलोमीटर बस चलाकर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। सड़क पर उनकी जिम्मेदारी केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित करना भी उनके काम का हिस्सा है। परिवहन क्षेत्र में महिला चालक के रूप में उनकी मौजूदगी दूसरी महिलाओं को भी परंपरागत सीमाओं से बाहर निकलकर अपने सपनों को पूरा करने का हौसला देती है। महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर चलाए जा रहे प्रयासों के बीच सोनू का सफर इस बात का उदाहरण है कि अवसर मिलने पर महिलाएं अपनी क्षमता साबित कर सकती हैं।
मंडल में अकेली महिला चालक, रोज तय करती हैं 540 किमी का सफर
अलीगढ़ के जट्टारी क्षेत्र के हजियापुर गांव की निवासी 28 वर्षीय सोनू मलान ने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह अलीगढ़ मंडल की इकलौती महिला बस चालक हैं। सोनू अलीगढ़ से नोएडा के बीच रोडवेज बस का संचालन करती हैं। इस रूट पर दिन में चार चक्कर लगाते हुए वह करीब 540 किलोमीटर की दूरी तय करती हैं।
प्रतिदिन इतने लंबे मार्ग पर बस चलाने के लिए एकाग्रता, धैर्य और अनुशासन की जरूरत होती है। सोनू इन जिम्मेदारियों को निभाते हुए यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। बस की चालक सीट पर महिला को देखकर कई यात्री शुरुआत में हैरान रह जाते हैं। हालांकि, जब वे सोनू को कुशलता से बस चलाते देखते हैं, तो उनकी सराहना करते हैं। यात्रियों की यह प्रतिक्रिया बताती है कि काम के प्रति दक्षता और जिम्मेदारी के जरिए पुरानी धारणाओं को बदला जा सकता है।
12 साल की उम्र में थामा ट्रैक्टर का स्टेयरिंग, अब चलाती हैं रोडवेज बस
सोनू मलान की ड्राइविंग से जुड़ी दिलचस्पी बचपन में ही शुरू हो गई थी। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने गांव में खेती-किसानी के काम के लिए ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे वाहनों को चलाने का उनका शौक गहरा होता गया और आगे चलकर यही रुचि उनके पेशे की नींव बन गई।
वर्ष 2021 में जब उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में महिला बस चालकों की नियुक्ति का अवसर आया, तो सोनू ने भी इसके लिए आवेदन करने का फैसला किया। चयनित महिलाओं में अलीगढ़ की सोनू मलान के साथ गाजियाबाद के सिकंदराबाद क्षेत्र की वेद कुमारी भी शामिल थीं। इस चयन ने सोनू को अपने पुराने शौक को रोजगार में बदलने का अवसर दिया। इसके बाद उन्होंने बस चालक के रूप में काम शुरू किया और अपनी मेहनत के दम पर इस क्षेत्र में अलग पहचान स्थापित की।
सोनू का सफर उन युवतियों के लिए भी प्रेरक है, जो किसी खास पेशे में महिलाओं की कम भागीदारी देखकर अपने कदम पीछे खींच लेती हैं। उनका अनुभव बताता है कि बचपन से विकसित रुचि, लगातार अभ्यास और सही अवसर मिलकर किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता बना सकते हैं।
तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाखों लोग करते हैं सोनू को फॉलो
सोनू मलान की लोकप्रियता रोडवेज बस और यात्रियों के बीच ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी दिखाई देती है। वह अपने काम और बस चलाने से जुड़े अनुभवों के वीडियो साझा करती हैं। इन वीडियो के जरिए लोग उनके रोजमर्रा के कामकाज और परिवहन क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों को करीब से देख पाते हैं।
बताया जाता है कि सोनू के यूट्यूब चैनल पर करीब दो लाख, इंस्टाग्राम पर लगभग डेढ़ लाख और फेसबुक पर करीब साढ़े छह लाख फॉलोअर्स हैं। सोशल मीडिया पर उनकी इस पहुंच ने उन्हें एक बड़ी पहचान दी है। उनके वीडियो देखने वाले लोग महिला बस चालक के तौर पर उनके अनुभवों में रुचि लेते हैं और उनके काम की सराहना करते हैं।
सोनू सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पेशेवर जिंदगी की झलक साझा करने के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश भी देती हैं। उनका उदाहरण दिखाता है कि किसी पेशे में ईमानदारी और निरंतरता से काम करने वाला व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र से बाहर भी लोगों को प्रभावित कर सकता है। इस तरह वह सड़क पर यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाने के साथ अपनी कहानी के जरिए दूसरी महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी योगदान दे रही हैं।
लोगों की बातों को पीछे छोड़ आगे बढ़ीं, परिवार बना ताकत
सोनू मलान के मुताबिक, जब उन्होंने बस चलाने के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया, तो शुरुआत में कुछ लोगों ने इसे महिलाओं के लिए उपयुक्त काम नहीं माना। उन्हें यह सुनने को मिला कि बस चलाना पुरुषों का काम है। लेकिन सोनू की दिलचस्पी इस पेशे में बनी रही और उन्होंने लोगों की बातों को अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया।
वह मानती हैं कि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में काम करने का अवसर मिलने से उन्हें अपने हुनर को साबित करने का मौका मिला। इस दौरान परिवार का सहयोग भी उनके लिए अहम रहा। सोनू के भाई भी परिवहन निगम में बस चालक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनके पिता शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। परिवार के समर्थन और अपनी मेहनत के सहारे उन्होंने इस पेशे में अपनी जगह बनाई।
सोनू बताती हैं कि बस में सफर करने वाली कई लड़कियां और महिलाएं उन्हें चालक की सीट पर देखकर सहज महसूस करती हैं। वे उनके काम की तारीफ करती हैं और कई बार यह भी कहती हैं कि उन्हें देखकर अपने सपनों को पूरा करने का भरोसा मिलता है। सोनू की यह उपलब्धि केवल एक महिला के बस चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सोच में बदलाव का संकेत भी है, जिसमें कुछ कामों को लंबे समय तक पुरुषों तक सीमित मान लिया गया था।
उनकी कहानी का संदेश साफ है कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अवसर के साथ मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब महिलाएं अपनी क्षमता पर भरोसा करके आगे बढ़ती हैं, तो वे न केवल अपनी पहचान बनाती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी नए रास्ते खोलती हैं।
