लखनऊ: उत्तर प्रदेश में रविवार को हुए योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में जहाँ 8 नेताओं को नई जिम्मेदारी और प्रमोशन मिला, वहीं कुछ ऐसे नाम भी रहे जिनकी उम्मीदें टूटने से सियासत गरमा गई है। महमूदाबाद से भारतीय जनता पार्टी की विधायक आशा मौर्य, जिनका नाम संभावित मंत्रियों की सूची में सबसे आगे चल रहा था, उन्हें जगह न मिलने पर उनका दर्द सार्वजनिक रूप से सामने आया है।
सोशल मीडिया पर बयां की मन की व्यथा
मंत्री पद की शपथ न मिलने के बाद आशा मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “एक समर्पित कार्यकर्ता होने के नाते कहीं न कहीं मन में थोड़ी पीड़ा अवश्य हुई है, क्योंकि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और निष्ठा हर कार्यकर्ता के लिए भावनात्मक रूप से जुड़ी होती है।” उन्होंने अपने 35 वर्षों के राजनैतिक सफर और संगठन के प्रति अटूट ईमानदारी का जिक्र करते हुए समर्थकों का आभार व्यक्त किया।
”पीड़ा संकल्प को कमजोर नहीं करेगी”
आशा मौर्य ने स्पष्ट किया कि हालांकि उन्हें इस विस्तार में शामिल न किए जाने का दुख है, लेकिन यह उनके सेवा भाव को कम नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “यह पीड़ा मेरे संकल्प को कमजोर नहीं करेगी, बल्कि समाज और संगठन के प्रति मेरी जिम्मेदारियों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। समाज के सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगी।”
महमूदाबाद में रचा था इतिहास
आशा मौर्य का राजनीतिक कद उस समय काफी बढ़ गया था जब 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह वर्मा को शिकस्त दी थी। वह महमूदाबाद सीट से निर्वाचित होने वाली पहली महिला विधायक बनीं। इससे पहले 2017 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और क्षेत्र में डटी रहीं। उनके पति हरि प्रसाद मौर्य लखनऊ में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता हैं।
संगठन के लिए समर्पित रहने का वादा
भले ही इस बार उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, लेकिन आशा मौर्य ने दोहराया कि वह पार्टी की एक अनुशासित सिपाही की तरह कार्य करती रहेंगी। उनके इस बयान को भाजपा के भीतर अंदरूनी असंतोष और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आलाकमान आगामी भविष्य में आशा मौर्य की इस ‘पीड़ा’ की भरपाई कैसे करता है।

