आगरा: ताजनगरी के थाना जैतपुर क्षेत्र में पुलिस की तत्परता और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सिस्टम की वजह से एक 17 वर्षीय छात्र को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया। दिल टूटने के बाद गहरे तनाव में डूबा यह छात्र जब सुसाइड की पूरी तैयारी कर चुका था, तब पुलिस ने महज 11 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचकर उसे बचा लिया। यह घटना न केवल पुलिस की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे आधुनिक तकनीक किसी की जिंदगी बचाने में ‘संजीवनी’ साबित हो सकती है।
आधी रात को लखनऊ से आगरा तक मचा हड़कंप
घटनाक्रम 3 मई की देर रात का है। अपनी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप के बाद मानसिक रूप से टूटे हुए छात्र ने रात करीब 1:49 बजे सोशल मीडिया पर एक सुसाइड नोट पोस्ट किया। पोस्ट होते ही लखनऊ स्थित डीजीपी कार्यालय के मीडिया सेल को ‘मेटा अलर्ट’ के जरिए इस संदिग्ध और खतरनाक पोस्ट की सूचना मिल गई। सोशल मीडिया सेल ने बिना एक पल गंवाए छात्र की लोकेशन ट्रेस की और तत्काल जैतपुर पुलिस को सक्रिय किया।
दरवाजा खुलते ही सन्न रह गई पुलिस
सूचना मिलते ही जैतपुर थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ लोकेशन पर पहुंचे। महज 11 मिनट के भीतर पुलिस छात्र के घर के उस कमरे तक पहुंच गई जहाँ वह बंद था। जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का मंजर डरावना था; छात्र के पास कीटनाशक की बोतल और रस्सी मौजूद थी। वह बस आत्मघाती कदम उठाने ही वाला था कि खाकी ने उसे सुरक्षित पकड़ लिया।
काउंसलिंग कर छात्र को संभाला
पुलिस ने छात्र को सुरक्षित बाहर निकाला और मौके पर ही उसकी सघन काउंसलिंग की। पुलिसकर्मियों ने बड़े भाई की तरह उसे समझाकर सामान्य किया और फिर परिजनों को सौंप दिया। छात्र के भाई रवि ने पुलिस की इस अद्भुत मुस्तैदी के लिए आभार व्यक्त किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर कुछ मिनटों की भी देरी होती तो परिणाम भयावह हो सकते थे।
”यह घटना उदाहरण है कि सोशल मीडिया पर की गई हर संदिग्ध गतिविधि पर पुलिस की पैनी नजर है। तकनीक और पुलिस रिस्पॉन्स के समन्वय ने आज एक परिवार का चिराग बुझने से बचा लिया।”

