आगरा: कहते हैं कि शरीर नश्वर है, लेकिन सेवा और संकल्प व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी जीवित रखते हैं। ताजनगरी के दो परिवारों ने इस बात को सच कर दिखाया है। अपनों को खोने के गहरे दुख और आंसुओं के बीच, इन परिवारों ने ‘नेत्रदान’ जैसा साहसी फैसला लेकर मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिससे अब चार दृष्टिहीनों की दुनिया फिर से रोशन हो सकेगी।
भाटिया परिवार का प्रेरक निर्णय
नेहरू नगर निवासी 72 वर्षीय रमेश चंद भाटिया (सुपुत्र स्व. हरीकिशन भाटिया) का रविवार रात स्वर्गवास हो गया। घर में शोक का माहौल था, लेकिन उनके पुत्र गौरव भाटिया ने पिता की यादों को दूसरों की आंखों में जिंदा रखने का निर्णय लिया। उन्होंने हिम्मत दिखाई और क्षेत्र बजाजा कमेटी के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल के माध्यम से नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरा कराया।
गोयल परिवार ने जगाई उम्मीद की किरण
ठीक इसी तरह, जयपुर हाउस के प्रभु नगर की रहने वाली 66 वर्षीय श्रीमती सरोज देवी गोयल (धर्मपत्नी स्व. अनिल कुमार गोयल) का सोमवार सुबह निधन हो गया। अपनी मां को खोने के गम में डूबे पुत्र पवन गोयल और आशीष कुमार गोयल ने इस कठिन समय में भी सामाजिक जिम्मेदारी को ऊपर रखा। उन्होंने कमेटी के पूर्व मंत्री राजेंद्र कुमार गोयल से संपर्क कर नेत्रदान का संकल्प दोहराया।
एस.एन. मेडिकल कॉलेज की टीम ने संभाली कमान
दोनों परिवारों की सहमति मिलते ही एस.एन. मेडिकल कॉलेज की आई बैंक टीम हरकत में आ गई। आई बैंक इंचार्ज डॉ. शेफाली मजूमदार के मार्गदर्शन में ग्रीफ काउंसलर दीपक शर्मा और डॉक्टरों के दल ने त्वरित कार्यवाही करते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया को सम्मानपूर्वक संपन्न कराया।
समाज से अपील: ‘आप भी बनें रोशनी का जरिया’
बजाजा कमेटी के पदाधिकारियों अध्यक्ष अनिल अग्रवाल, महासचिव राजीव अग्रवाल, नेत्रदान प्रभारी विष्णु जैन और मीडिया प्रभारी नंदकिशोर गोयल ने इन दोनों परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे मृत्यु के बाद अंगदान और नेत्रदान के महत्व को समझें।
संस्था ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प लेना चाहता है या किसी परिजन की मृत्यु के बाद अंगदान करना चाहता है, तो वह हेल्पलाइन नंबर 9319809451 पर संपर्क कर सकता है। इन चार कॉर्निया डोनेशन से अब चार जरूरतमंदों के जीवन का अंधेरा दूर होगा।

