सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में है। सिद्धार्थनगर जिले के खुनियांव ब्लॉक अंतर्गत रामापुर विशुनपुर गांव में निर्माणधीन एक विशाल स्टील बॉडी ओवरहेड टैंक सोमवार को आई हल्की आंधी और बारिश का वेग भी सहन नहीं कर सका। तेज हवाओं के चलते निर्माणाधीन टैंक का ऊपरी हिस्सा बुरी तरह मुड़कर नीचे की ओर लटक गया, जिसे देखकर ग्रामीण दंग रह गए।
निर्माण की गुणवत्ता पर खड़े हुए बड़े सवाल
रामापुर विशुनपुर गांव में इस टैंक का निर्माण पिछले कई महीनों से चल रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। सोमवार को जैसे ही मौसम बदला, निर्माणाधीन स्टील टैंक खिलौने की तरह पिचक गया।
ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना संबंधित विभाग के अधिकारियों को दी और मौके पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया। लोगों का कहना है कि जब एक हल्की आंधी में टंकी का यह हाल है, तो भविष्य में इसके चालू होने पर यह कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती है।
भ्रष्टाचार का पुराना ‘ट्रैक रिकॉर्ड’
यूपी में जल जीवन मिशन के तहत बनी टंकियों का धराशायी होना कोई नई बात नहीं है। सिद्धार्थनगर की इस घटना ने प्रदेश में पूर्व में हुए हादसों की यादें ताजा कर दी हैं, जो सीधे तौर पर निर्माण की गुणवत्ता और अधिकारियों की निगरानी पर सवाल उठाते हैं:
सीतापुर (मई 2025): महमूदाबाद के चुनका गांव में 5.31 करोड़ की लागत से बनी टंकी ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी।
महोबा (फरवरी 2026): टेस्टिंग के महज 24 घंटे के भीतर 65 लाख की टंकी में दरारें आ गईं और पानी फव्वारे की तरह बहने लगा था।
लखीमपुर खीरी (अप्रैल 2025): ट्रायल रन के दौरान ही 3.5 करोड़ की ओवरहेड टैंक फट गई थी।
कार्रवाई की मांग पर अड़े ग्रामीण
सिद्धार्थनगर के ग्रामीणों ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल, क्षतिग्रस्त टैंक का हिस्सा हवा में झूल रहा है, जो जल जीवन मिशन में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रहा है। अब देखना यह है कि विभाग इस लापरवाही पर ठेकेदार और जिम्मेदार इंजीनियरों के खिलाफ क्या कदम उठाता है।

