आगरा: ताजनगरी में बेजुबानों के प्रति बढ़ती क्रूरता और उन पर होने वाले हमलों को लेकर पुलिस का रवैया अब विवादों के घेरे में है। एसपीसीए (SPCA) आगरा की सदस्य और कैस्पर्स होम ट्रस्ट की संचालिका विनीता अरोड़ा ने डीसीपी सिटी से मुलाकात कर पुलिस की निष्क्रियता और दुर्व्यवहार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शहर के कई थानों में पशु क्रूरता की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने के बजाय शिकायतकर्ताओं को ही प्रताड़ित किया जा रहा है।
चार गंभीर मामलों में कार्रवाई न करने का दावा
विनीता अरोड़ा द्वारा सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, थाना एत्माद्दौला, सिकंदरा और न्यू आगरा क्षेत्रों में पशु क्रूरता के चार संगीन मामले सामने आए, जिनमें पिल्ले को जलाने और पालतू कुत्ते को जंगल में फेंकने जैसी घटनाएं शामिल थीं। आरोप है कि नगर निगम और एसपीसीए के आधिकारिक आवेदनों के बावजूद पुलिस ने सहयोग नहीं किया और मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप और दुर्व्यवहार
शिकायत में विशेष रूप से थाना एत्माद्दौला प्रभारी धर्मेन्द्र यादव पर निशाना साधा गया है। विनीता अरोड़ा (60 वर्ष) का आरोप है कि थाना प्रभारी ने उनके साथ अशिष्ट व्यवहार किया। साथ ही, 26 अप्रैल को एक स्वयंसेवक पर करीब 25 लोगों के साथ मिलकर केस वापस लेने का दबाव बनाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।
असुरक्षित महसूस कर रहे हैं पशु प्रेमी
विनीता अरोड़ा ने शहर की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि नगर निगम के ड्राइवरों, एबीसी स्टाफ और डॉग फीडर्स पर लगातार हमले हो रहे हैं। सामुदायिक कुत्तों को जबरन हटाना और पालतू जानवरों के साथ अमानवीय व्यवहार अब आम होता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने समय रहते इन असामाजिक तत्वों पर नकेल नहीं कसी, तो शहर में गुंडाराज स्थापित हो जाएगा।
डीसीपी सिटी का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सिटी ने आश्वासन दिया है कि लंबित पड़े सभी मामलों का तुरंत संज्ञान लिया जाएगा और दोषी थानों व अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। विनीता अरोड़ा ने साफ किया कि पुलिस को एसपीसीए और नगर निगम के साथ समन्वय करना चाहिए, न कि अपराधों को दबाना चाहिए।
इस दौरान जितेंद्र दायपुरिया, विशाल सैनी और अनिरुद्ध तोमर सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। पत्र की प्रतियां डीएम और सीवीओ आगरा को भी भेजी गई हैं।

