आगरा में जाट समाज का ‘रणघोष’: केंद्रीय आरक्षण के लिए अब आर-पार की जंग, सरकार को दी वोट की चोट की चेतावनी

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मलपुरा (आगरा): अंतरराष्ट्रीय जाट दिवस के पावन अवसर पर ताजनगरी के बमरौली रोड स्थित भगवती गार्डन में जाट समाज का विराट स्वरूप देखने को मिला। ‘अखिल भारतीय जाट महासभा’ द्वारा आयोजित इस वृहद कार्यक्रम में समाज के दिग्गजों ने एक स्वर में हुंकार भरते हुए केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की बहाली को अपना अंतिम और निर्णायक संघर्ष घोषित कर दिया। वक्ताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वर्षों पुराने वादे पूरे नहीं हुए, तो आगामी चुनावों में समाज कड़ा राजनीतिक निर्णय लेने को मजबूर होगा।

महापुरुषों को नमन और विरासत की याद:

कार्यक्रम का शुभारंभ समाज के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए हुआ। सम्राट पोरस, महाराजा सूरजमल, वीर गोकुला जाट, राजा महेंद्र प्रताप और महाराजा रणजीत सिंह जैसी महान विभूतियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। साथ ही बैसाखी पर्व और जलियांवाला बाग के शहीदों को भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

​आरक्षण की बहाली अब मान-सम्मान का मुद्दा:

मुख्य अतिथि और प्रदेश अध्यक्ष प्रताप चौधरी (पूर्व विधायक) ने कहा कि जाट युवाओं के भविष्य के साथ अब और खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। यह आरक्षण की अंतिम लड़ाई है, जिसे समाज हर कीमत पर जीतेगा। जिला अध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि 2014 में सरकार की कमजोर पैरवी के कारण आरक्षण निरस्त हुआ, जिसका खामियाजा आज लाखों शिक्षित युवा बेरोजगारी के रूप में भुगत रहे हैं।

​वोट की शक्ति का अहसास कराने की तैयारी:

प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी गोपीचंद और मंडल अध्यक्ष मेघराज सोलंकी समेत अन्य वक्ताओं ने कहा कि सरकार पिछले 11 वर्षों से केवल आश्वासन दे रही है। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जाट समाज अपने ‘वोट’ के अधिकार के जरिए सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराएगा।

युवा और महिला शक्ति का संकल्प:

युवा प्रदेश उपाध्यक्ष नरेश इंदौलिया और देवेंद्र चाहर ने युवाओं को संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। वहीं, महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष श्रीमती निर्मल चाहर और वंदना सिंह ने स्पष्ट किया कि इस सामाजिक न्याय की लड़ाई में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सड़कों पर उतरेंगी।

​मंच पर मौजूद रहे समाज के दिग्गज:

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रहलाद सिंह चाहर (बाबूजी) ने की। संचालन वीरेंद्र सिंह छोंकर और अनिल चाहर ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान प्रताप सिंह चाहर, अजीत चाहर प्रधान, बॉबी प्रधान, गौरव चौधरी, प्रमेंद्र फौजदार और संजय सोलंकी सहित हजारों की संख्या में समाज के गणमान्य नागरिक और युवा उपस्थित रहे।