ग्रेटर नोएडा/नोएडा: दिल्ली से सटे हाईटेक शहर नोएडा के फेज-2 इलाके में सोमवार को वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अचानक ‘खूनी संघर्ष’ और भारी आगजनी में तब्दील हो गया। पिछले चार दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हजारों कर्मचारी सोमवार सुबह अचानक उग्र हो गए, जिसके बाद पूरे इलाके में युद्ध जैसी स्थिति बन गई।
हिंसा का तांडव और आगजनी
सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे, फेज-2 स्थित मदरसन कंपनी समेत ऋचा ग्लोबल, रेनबो और पैरामाउंट जैसी करीब आधा दर्जन होजरी कंपनियों के हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। देखते ही देखते भीड़ हिंसक हो गई और वाहनों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उग्र कर्मचारियों ने न केवल निजी कारों में तोड़फोड़ कर उन्हें आग के हवाले किया, बल्कि ड्यूटी पर मौजूद पुलिस बल पर भी जमकर पथराव किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की जीप को पलट दिया और उसमें आग लगा दी, जिससे आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया।
क्यों भड़का कर्मचारियों का गुस्सा?
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का मुख्य आरोप है कि पड़ोसी राज्य हरियाणा में न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, लेकिन नोएडा की कंपनियां इसे लागू करने में आनाकानी कर रही हैं। उनकी प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन। ओवरटाइम का दोगुना भुगतान। समय पर सैलरी और कार्यस्थल पर उत्पीड़न से सुरक्षा। वेतन वृद्धि को लेकर कंपनियों से लिखित आश्वासन शामिल हैं।
प्रशासनिक विफलता और पुलिसिया कार्रवाई
बताया जा रहा है कि रविवार को प्रशासन, पुलिस कमिश्नर और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ कर्मचारियों की लंबी बैठक हुई थी, जो बेनतीजा रही। इसी असहमति के चलते सोमवार को आक्रोश फूट पड़ा। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस हिंसा के कारण नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली के बीच चलने वाला यातायात पूरी तरह ठप हो गया और मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल, फेज-2 के औद्योगिक क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई है। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में होने का दावा किया है, लेकिन इलाके में तनाव बरकरार है। प्रशासन ने श्रमिकों से शांति की अपील करते हुए कहा है कि उनकी जायज मांगों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


