आगरा में किसानों को मिले ‘नोएडा’ जैसी सुविधा: सांसद ने कमिश्नर से की विकसित प्लॉट और नौकरी की मांग

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आगरा: फतेहपुर सीकरी के सांसद और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) की टाउनशिप योजनाओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप से मुलाकात कर सांसद ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जो एडीए के करोड़ों के मुनाफे में सीधे किसानों को भागीदार बनाएगा।

सांसद चाहर की मांग है कि ‘अटलपुरम्’ और ‘ग्रेटर आगरा’ जैसी मेगा प्रोजेक्ट्स में जमीन देने वाले किसानों को केवल एकमुश्त मुआवजा न मिले, बल्कि उन्हें विकसित भूमि का 6 से 7 प्रतिशत हिस्सा (प्लॉट) भी निःशुल्क दिया जाए।

​एडीए कमाएगा 5000 करोड़, किसान क्यों रहे पीछे?

सांसद राजकुमार चाहर ने आंकड़ों के साथ एडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि ग्वालियर रोड पर 340 एकड़ में विकसित हो रही ‘अटलपुरम्’ योजना की कुल लागत करीब 738 करोड़ रुपये है, जबकि एडीए इसे बेचकर 1527 करोड़ रुपये कमाने की तैयारी में है। इसी तरह ‘ग्रेटर आगरा’ परियोजना में भी एडीए को करीब 5000 करोड़ रुपये का मुनाफा होने का अनुमान है। सांसद का तर्क है कि जब प्राधिकरण व्यावसायिक लाभ के लिए किसानों की पुश्तैनी जमीन ले रहा है, तो उस लाभ में अन्नदाता का हिस्सा होना न्यायसंगत है।

​”आगरा में भी लागू हो नोएडा-गाजियाबाद मॉडल”

सांसद ने मंडलायुक्त को सौंपे मांग पत्र में उदाहरण देते हुए कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद विकास प्राधिकरणों में नियम है कि अधिग्रहीत भूमि के बदले किसानों को विकसित क्षेत्र का 6 प्रतिशत भूखंड वापस दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में किसानों का भविष्य इस तरह सुरक्षित किया जा सकता है, तो आगरा विकास प्राधिकरण इस व्यवस्था को लागू करने में पीछे क्यों है?

​मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरा, भविष्य की सुरक्षा जरूरी

राजकुमार चाहर ने कहा कि रहनकलां और रायपुर जैसे क्षेत्रों में किसानों को महज 1600 रुपये प्रति वर्गमीटर का मुआवजा दिया गया है, जबकि एडीए वहां 32 से 33 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से प्लॉट बेचने की तैयारी में है। भविष्य में ये कीमतें 70 हजार रुपये तक पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थिति में किसान भूमिहीन हो जाएगा, जबकि प्राधिकरण मालामाल होगा।

​नौकरी और लाभांश की बड़ी मांग

​सांसद ने अपनी मांगों को केवल प्लॉट तक सीमित नहीं रखा है, उन्होंने मांग की है कि:

​प्रभावित किसान परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

​एडीए बोर्ड की तत्काल बैठक बुलाकर किसानों के पक्ष में नीतिगत निर्णय लिया जाए।

विकसित भूमि का 6-7 प्रतिशत हिस्सा किसानों को आवंटित कर उनके भविष्य को आर्थिक मजबूती दी जाए।