नोएडा: उत्तर प्रदेश के हाई-टेक शहर नोएडा के जिला अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग की एक ऐसी शर्मनाक लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के इलाज के लिए 60,000 ऐसी सिरिंज का ऑर्डर दे दिया, जो केवल पशुओं (Veterinary) के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। ताज्जुब की बात यह है कि फार्मासिस्ट से लेकर सीएमएस (CMS) तक की फाइलों से गुजरने के बाद भी किसी की नजर इस ‘ब्लंडर’ पर नहीं पड़ी।
जेम पोर्टल से हुआ ‘जानलेवा’ ऑर्डर
पूरा मामला 25 दिसंबर 2025 का है, जब जिला अस्पताल ने जेम (GeM) पोर्टल के जरिए लखनऊ की एक एजेंसी को 60,000 सिरिंज का ऑर्डर जारी किया। एक महीने बाद जब सप्लाई अस्पताल पहुंची और स्टोर रूम में बॉक्स खोले गए, तो वहां मौजूद कर्मचारी दंग रह गए। उन बॉक्स पर स्पष्ट रूप से ‘पशु चिकित्सा उपयोग के लिए’ लिखा था।
सरकारी सिस्टम की सुस्ती देखिए कि तीन स्तर के अधिकारियों की निगरानी के बावजूद किसी ने यह नहीं जांचा कि इंसानों के अस्पताल में जानवरों की सिरिंज क्यों मंगाई जा रही हैं।
अखिलेश यादव का तंज: “क्या भाजपा इंसानों को इंसान समझती है?”
इस खबर के वायरल होते ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा ”शायद इसमें कमीशन ज्यादा मिल रहा होगा। भाजपा इंसान को इंसान कहां समझती है, इसीलिए नोएडा के जिला अस्पताल में जानवरों की सिरिंज मंगा ली। इसकी एक सुई स्वास्थ्य मंत्रालय को लगवा दी जाए तो शायद उनकी तबीयत सुधर जाए।”
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या स्वास्थ्य मंत्री छुट्टी पर हैं या उनकी छुट्टी हो गई है? उन्होंने इस पूरे मामले की सघन जांच की मांग की है।
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा प्रशासन?
मामला खुलने के बाद अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजय राणा का कहना है कि यह गलती सप्लाई करने वाली एजेंसी की है और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। हालांकि, पोर्टल के रिकॉर्ड बताते हैं कि ऑर्डर में ही ‘वेटरनरी सिरिंज’ लिखा गया था। ऐसे में सवाल यह है कि जब मांग ही गलत भेजी गई, तो दोष केवल एजेंसी का कैसे? फिलहाल इस फजीहत को दबाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही ने जनता के भरोसे को तगड़ा झटका दिया है।

