IAS रिंकू सिंह राही के इस्तीफे से UP की सियासत गरमाई: अखिलेश यादव बोले- इस्तीफा न दें, बुरे दिन जाने वाले हैं…

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नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही द्वारा सरकारी व्यवस्था से क्षुब्ध होकर इस्तीफा देने के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर योगी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए तीखा हमला बोला है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में ईमानदार और कर्मठ अधिकारियों के बजाय भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को तरजीह दी जा रही है।

“चोरी के पैसों की चोरी वालों की पूछ है भाजपा में”

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कुशल अधिकारियों की भाजपा सरकार में कोई अहमियत नहीं है। भाजपा में तो उनकी पूछ है जिनकी चोरी के पैसों की ही चोरी हो जाती है या जो निवेश तक में 5 फीसदी का प्रवेश शुल्क वसूल लेते हैं।” उन्होंने सीधे तौर पर सरकार के कार्यतंत्र और भ्रष्टाचार के कथित ‘कमीशन मॉडल’ पर निशाना साधा।

अधिकारियों से अपील: “भावावेश में न आएं, बुरे दिन जाने वाले हैं”

​अखिलेश ने आईएएस रिंकू सिंह राही के इस्तीफे को एक ‘पीड़ा’ बताते हुए प्रदेश के अन्य अधिकारियों से भावुक अपील की। उन्होंने लिखा, “हर अच्छे अधिकारी से हमारी मांग है कि भावावेश में आकर कोई फैसला न करें, बुरे दिन जाने वाले हैं।” उन्होंने अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि आगामी PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सरकार में हर पारंगत अधिकारी की कद्र की जाएगी और उन्हें उचित मान-सम्मान व स्थान दिया जाएगा।

​”जो पीड़ित, वो PDA”: अखिलेश का नया नारा

सपा मुखिया ने अपने पोस्ट में साफ किया कि पीड़ित अधिकारी और कर्मचारी अब भाजपा सरकार को हटाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने एक नया समीकरण देते हुए कहा “पीड़ा बढ़ रही है, इसीलिए पीडीए बढ़ रहा है क्योंकि जो पीड़ित, वो पीडीए।” अखिलेश के अनुसार, पीडीए सरकार ही तय समय सीमा में ‘क्वालिटी वर्क’ करने वाले ऑफिसर्स की कद्र करेगी।

​क्यों दिया IAS रिंकू सिंह राही ने इस्तीफा?

बता दें कि आईएएस रिंकू सिंह राही लंबे समय से साइड पोस्टिंग और काम न मिलने से नाराज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘समानांतर व्यवस्था’ के कारण वे जनता की सेवा नहीं कर पा रहे थे। रिंकू सिंह राही पहले भी सुर्खियों में रहे हैं एसडीएम रहते हुए पुवायां तहसील में सफाई को लेकर उन्होंने सख्त कदम उठाए थे और खुद उठक-बैठक कर चर्चा बटोरी थी। उनके इस्तीफे ने नौकरशाही के भीतर चल रहे असंतोष को सतह पर ला दिया है।