नई दिल्ली/आगरा: ताजनगरी की यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) की एक छात्रा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। बी.एससी. (ऑनर्स) केमिस्ट्री की मेधावी छात्रा मोहिनी सिंह को प्रतिष्ठित ‘जल शक्ति हैकाथॉन 2025’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। विश्व जल दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने मोहिनी को यह सम्मान प्रदान किया।
क्या है मोहिनी का ‘मैजिक’ प्रोजेक्ट?
मोहिनी सिंह को यह पुरस्कार उनके क्रांतिकारी शोध परियोजना ‘जल से माइक्रोप्लास्टिक्स को हटाने के लिए अधिशोषक-आधारित तकनीक का विकास’ (Project ID: project-4569) के लिए दिया गया है।
जमीनी शोध: यह रिसर्च यमुना नदी के पोइया घाट (बैकुंठधाम) क्षेत्र में डीईआई की ‘नदी विकास पहल’ के अंतर्गत किया गया।
तकनीकी नवाचार: मोहिनी ने एक ऐसी ‘अधिशोषक’ (Adsorbent) तकनीक विकसित की है, जो पानी में घुले सूक्ष्म प्लास्टिक कणों (माइक्रोप्लास्टिक) को सोखने में सक्षम है, जिससे जल जनित बीमारियों और जलीय जीवन पर पड़ने वाले खतरों को कम किया जा सकेगा।
₹1 लाख का पुरस्कार और सरकार का साथ
इस बड़ी उपलब्धि के लिए मोहिनी को ₹1,00,000 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। जल शक्ति मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट की गंभीरता और उपयोगिता को देखते हुए मोहिनी से ‘प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ प्रस्तुत करने को कहा है। इसके सफल परीक्षण के बाद, केंद्र सरकार आगे के अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेगी।
गुरु के मार्गदर्शन से मिली सफलता
मोहिनी की इस सफलता के पीछे उनके मार्गदर्शक और रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. पुष्पा साहनी का कुशल निर्देशन रहा है। उनके नेतृत्व में तैयार किए गए इस शोध ने सैकड़ों प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रीय पटल पर अपनी जगह बनाई।
DEI और आगरा के लिए गर्व का क्षण
यह उपलब्धि न सिर्फ दयालबाग संस्थान के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह यमुना नदी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के स्थानीय प्रयासों को एक नई वैश्विक और तकनीकी दिशा देने वाली साबित होगी। मोहिनी की इस सफलता पर संस्थान के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने हर्ष व्यक्त किया है।

