आगरा में श्रीराम कथा का भावपूर्ण विश्राम: स्वामी रामस्वरूपाचार्य ने सुनाई हनुमान जी की महिमा, उमड़ा जनसैलाब

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आगरा: ताजनगरी के ग्वालियर रोड स्थित पीएस गार्डन में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का रविवार को अत्यंत भावपूर्ण और भक्तिमय वातावरण में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन चित्रकूट के कामदगिरि पीठाधीश्वर स्वामी रामस्वरूपाचार्य ने व्यासपीठ से पवनपुत्र हनुमान की भक्ति, शक्ति और मर्यादा का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि पाण्डाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

राक्षसी परिवेश में भी धर्म की विजय

स्वामी जी ने लंका कांड के प्रसंगों की व्याख्या करते हुए तीन प्रमुख शक्तियों—सती सुलोचना का पतिव्रत धर्म, विभीषण का भजन और इंद्रजीत की शक्ति—का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंका जैसे राक्षसी वातावरण में रहकर भी विभीषण ने भक्ति और सुलोचना ने धर्म का त्याग नहीं किया, जो यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी संयम और साधना ही मनुष्य को महान बनाती है।

भारतीय संस्कृति और नारी शक्ति पर जोर

पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वामी रामस्वरूपाचार्य ने कहा कि भारतीय नारी का त्याग और आस्था विश्व में अतुलनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंदूर और मंगलसूत्र केवल दिखावे के आभूषण नहीं हैं, बल्कि ये वैवाहिक जीवन की शुचिता और गरिमा के प्रतीक हैं।

उन्होंने माता सीता के 14 महीने के वनवास और लंका प्रवास का उदाहरण देते हुए कहा कि नारी का श्रृंगार केवल अपने पति की प्रसन्नता के लिए होना चाहिए, न कि प्रदर्शन के लिए।

जीवन के उतार-चढ़ाव में आशावाद का मंत्र

कथा के दौरान उन्होंने तुलसीदास जी की चौपाइयों के माध्यम से समझाया कि हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश सब विधि (ईश्वर) के हाथ में है। इसलिए मनुष्य को असफलताओं से निराश होने के बजाय सदा आशावादी रहकर कर्म करना चाहिए। उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े रहने का आह्वान किया।

विश्राम दिवस पर उमड़ी भारी भीड़

कथा के विश्राम अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष राम सेवक शर्मा (जय भोले), महामंत्री धर्मेंद्र त्यागी और मुख्य यजमान सिलेंद्र विथरिया ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख श्रीकांत त्यागी, डॉ. उदिता त्यागी, हाकिम सिंह त्यागी और भारी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे। कथा समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।