भक्तिमय हुई ताजनगरी: कहीं श्रीराम कथा की अमृत वर्षा, तो कहीं बाबा हरदौल की शोभायात्रा; धर्ममय हुआ आगरा का कोना-कोना

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आगरा। ताजनगरी में बुधवार का दिन आध्यात्मिक उत्सवों के नाम रहा। शहर के विभिन्न अंचलों में कहीं शंखनाद हुआ तो कहीं ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से आकाश गुंजायमान हो उठा। लंगड़े की चौकी में श्रीराम कथा के शुभारंभ से लेकर धाकरान तक निकली बाबा हरदौल की शोभायात्रा और जैन मंदिर में आदिनाथ महामंडल विधान तक, हर तरफ आस्था का ऐसा महासंगम दिखा कि पूरा शहर भक्ति के रस में सराबोर हो गया।

​501 कलशों के साथ श्रीराम कथा का भव्य श्रीगणेश

शास्त्री नगर स्थित लंगड़े की चौकी में गणेश दुर्गा महोत्सव कमेटी द्वारा आयोजित 10 दिवसीय श्रीराम कथा का मंगल शुभारंभ भव्य कलश यात्रा से हुआ। मुख्य अतिथि विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने प्राचीन हनुमान मंदिर में आरती कर यात्रा को रवाना किया। पीत वस्त्रों में सजी 501 महिलाओं ने जब सिर पर मंगल कलश रखकर कदम बढ़ाए, तो मार्ग में पुष्पवर्षा से उनका स्वागत हुआ।

​आयोजन समिति के अध्यक्ष लालू जादौन व पिंकी जादौन ने श्रद्धापूर्वक श्रीरामचरितमानस को शीश पर धारण किया। कथा व्यास भरत उपाध्याय ने बताया कि 20 मार्च तक चलने वाली यह कथा मानव जीवन को मर्यादा और आदर्श की राह दिखाएगी। महंत गोपी गुरु ने इसे कलयुग में उद्धार का मार्ग बताया।

बाबा कुंवर हरदौल की शोभायात्रा में उमड़ी भीड़

बुंदेलखंड के लोकदेवता बाबा कुंवर हरदौल जी महाराज के 364वें वार्षिक उत्सव पर अलबतिया रोड से धाकरान तक आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। डॉ. खेमचंद धाकड़ और प्रकाश धाकड़ ने आरती कर शोभायात्रा का शुभारंभ किया। यात्रा में शिव-पार्वती, आदि योगी और श्रीराम दरबार की मनमोहक झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। अंतिम डोले में बाबा हरदौल के दर्शन के लिए मार्ग में हजारों श्रद्धालु खड़े रहे। अध्यक्ष आलोक धाकड़ के नेतृत्व में यह यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई बुंदेले मंदिर पर संपन्न हुई।

​आदिनाथ महामंडल विधान में गूँजा ‘जय जिनेंद्र’

​नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन भक्ति की अविरल धारा बही। मुनिश्री विलोकसागर जी एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज के सानिध्य में आदिनाथ महामंडल विधान का आयोजन हुआ।

मुनिश्री विलोकसागर जी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि तीर्थंकरों के कल्याणक महोत्सव आत्मशुद्धि का अवसर होते हैं। इस दौरान अभिषेक, शांतिधारा और ध्वजारोहण के अनुष्ठानों में जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ कमाया।