वॉशिंगटन/रियाद/तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब जो कूटनीतिक राज फाश हो रहे हैं, उन्होंने पूरी दुनिया को सुन्न कर दिया है। ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की एक विस्फोटक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान पर अमेरिकी हमले (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) के पीछे सबसे बड़ा हाथ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का था। रिपोर्ट का दावा है कि MBS ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कई बार ‘प्राइवेट कॉल’ कर ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए मजबूर किया था।
दोहरा चेहरा: दुनिया के सामने दोस्ती, पर्दे के पीछे ‘लॉबिंग’
पिछले दो-तीन वर्षों से चीन की मध्यस्थता के बाद लग रहा था कि ईरान और सऊदी अरब करीब आ रहे हैं, लेकिन यह सिर्फ एक छलावा था।
रिपोर्ट के अनुसार जब ट्रंप कूटनीतिक समाधान तलाश रहे थे, तब MBS ने उन्हें भरोसा दिलाया कि ईरान को सिर्फ ‘सैन्य ताकत’ से ही रोका जा सकता है। सऊदी ने अमेरिका को गारंटी दी कि यदि ईरान जवाबी हमला करता है, तो सऊदी अरब वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी संभालेगा। MBS ने ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के साथ अपनी नजदीकियों का इस्तेमाल कर ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) के एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ाया।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’: मकसद सिर्फ तबाही नहीं, खामेनेई का अंत था
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना था कि ईरान से तत्काल कोई खतरा नहीं है, फिर भी ट्रंप ने अपने दो सबसे करीबी सहयोगियों इजरायल (नेतन्याहू) और सऊदी अरब (MBS) के भारी दबाव में आकर हमले का बटन दबाया। इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य ईरान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता खामेनेई को खत्म करना था, जिसमें वे सफल रहे।
जेडी वेंस का भरोसा: “इराक जैसा दलदल नहीं बनेगा ईरान”
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि यह हमला इराक युद्ध की तरह सालों तक नहीं खिंचेगा। अमेरिका का मकसद केवल सत्ता परिवर्तन कर जल्द से जल्द बाहर निकलना है, ताकि वह किसी लंबे युद्ध के दलदल में न फंसे।

