यूपी के आयुष कॉलेजों में फर्जी एडमीशन मामला: निदेशक प्रो.एसएन सिंह व मास्टरमाइंड समेत 12 गिरफ्तार

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गौरतलब है कि मेरिट में बदलाव करके छात्रों के प्रवेश के मामले में फर्जीवाड़ा की एसटीएफ कार्रवाई कर रही है। इनमें जांच में दोषी पाए गए निलंबित निदेशक, आयुर्वेद सेवाएं और सदस्य सचिव काउंसिलिंग प्रो. एसएन सिंह के अलावा निलंबित प्रभारी अधिकारी शिक्षा निदेशालय, आयुर्वेद सेवाएं डॉ.उमाकांत यादव, निदेशालय में काउंसिलिंग की फीस जमा करने की जिम्मेदारी संभालने वाले लिपिक राजेश सिंह और दूसरे सहयोगी लिपिक कैलाश चंद्र भास्कर के नाम शामिल हैं। इनसे पूछताछ में कई और इनपुट मिले हैं। हालांकि अभी STF के अधिकारी इसका खुलासा नहीं कर रहे हैं।

दाखिले में फर्जीवाड़े का खेल हुआ बेनकाब

जानकारी के मुताबिक इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड कुलदीप के गिरफ्त में आते ही हेराफेरी की सभी परतें पूरी तरह से खुल गईं। इसी के आधार पर STF ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। बड़ी बात ये भी हैं कि शासन ने 7 नवंबर को ही इस मामले की जांच CBI से कराए जाने की सिफारिश की थी। अभी तक CBI ने केस हैंड ओवर नहीं लिया है। इससे पहले ही STF अपनी जांच में लगभग तह तक पहुंचने में कामयाब रही।

13 दिन की जांच में सामने आया नेक्सस

STF ने काउंसिलिंग कराने वाली एजेंसी V3 सॉफ्ट सॉल्यूशन के 8 एम्प्लॉई को भी गिरफ्तार किया है। इनमें गौरव गुप्ता, हर्षवर्धन तिवारी, सौरभ मौर्य, रूपेश श्रीवास्तव, रूपेश रंजन पांडेय, इंद्र देव मिश्रा और प्रबोध कुमार सिंह शामिल हैं।

आयुर्वेद निदेशक ने ही दर्ज कराया था केस

आयुष कॉलेजों में सत्र-2021 में कुल 891 फर्जी छात्रों के प्रवेश का गंभीर मामला सामने आया था। जिसे सीएम योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीरता से लिया था। प्रकरण में तत्कालीन कार्यवाहक निदेशक, आयुर्वेदिक सेवाएं प्रो.एसएन सिंह की ओर से 4 नवंबर को हजरतगंज कोतवाली में डाटा फीडिंग का काम कर रही कंपनी अपट्रान पावरट्रानिक्स और उसकी वेंडर कंपनी V-3 साफ्ट साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि कुलदीप सिंह सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में FIR दर्ज कराई गई थी।

बड़ा मामला सामने आते ही इसकी जांच STF को सौंप दी गई थी, जिसके बाद से पूरे प्रकरण में शामिल लोगों की छानबीन की जा रही थी। संदेह के घेरे में आए कई लोगों से अलग-अलग पूछताछ किए जाने के साथ ही STF ने 23 कॉलेजों के प्राचार्य को नोटिस देकर तलब किया था और उनसे भी बारी-बारी पूछताछ की चल रही थी।

बिना NEET में शामिल 22 स्टूडेंट्स को भी मिला था दाखिला

जांच में सामने आया कि आयुर्वेद, होम्योपैथिक व यूनानी कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रम के दाखिलों में खूब धांधली की गई। मेरिट सूची में खेल कर अधिकारियों और कंपनी की मिलीभगत से BAMS, BUMS, BHMS पाठ्यक्रम में ऐसे लगभग 891 स्टूडेंट्स को गलत ढंग से दाखिला दिया गया था। इनमें 22 ऐसे भी छात्र रहे जो प्रवेश परीक्षा में भी शामिल नही हुए थे।

इतना ही नहीं, कम मेरिट वाले छात्रों को अच्छे कालेज भी आवंटित किए गए थे। शासन के निर्देश पर फर्जी प्रवेश पाने वाले छात्रों काे निलंबित किया जा चुका है।

Compiled: up18 News

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