आगरा के DEI में एआई का महाकुंभ: ‘सक्षम 2026’ कार्यशाला में 100 प्रतिभागियों ने सीखे भविष्य की तकनीक के गुर

Career/Jobs

आगरा। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI) के टेक्निकल कॉलेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आधुनिक तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोग से युवाओं को परिचित कराने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला ‘सक्षम 2026’ (SAKSHAM 2026) का भव्य आयोजन किया गया। पैनिनक्स लैब्स के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में संस्थान के विभिन्न संकायों से कुल 100 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को जेनरेटिव एआई, इंटेलिजेंट एआई एजेंट्स और विजन एआई जैसी उभरती हुई तकनीकों की जानकारी देने के साथ-साथ वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में इनके व्यावहारिक इस्तेमाल का सीधा अनुभव भी कराया गया।

​शताब्दी समारोह के अंतर्गत हुआ आयोजन

​’सक्षम 2026′ का पूरा नाम ‘स्किल्स इन अप्लाइड एआई, नॉलेज एंड स्मार्ट ह्यूमन-सेंट्रेड ऑटोमेशन मेथड्स’ है। यह प्रतिष्ठित आयोजन वर्ष 1927 में स्थापित डीईआई टेक्निकल कॉलेज के शताब्दी समारोह की श्रृंखला के अंतर्गत किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को आज की आधुनिक औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों के साथ जोड़ना तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को एआई आधारित नई कार्यप्रणालियों के लिए पूरी तरह तैयार करना था।

कार्यक्रम के दौरान दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन, डीईआई टेक्निकल कॉलेज के प्राचार्य तथा पैनिनक्स लैब्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

विभिन्न संकायों से जुड़े 100 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

इस एक दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न शैक्षणिक इकाइयों के कुल 100 मेधावी प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इनमें DEI टेक्निकल कॉलेज के 84 प्रतिभागी, सामाजिक विज्ञान संकाय के 13 प्रतिभागी, विज्ञान संकाय के 2 प्रतिभागी, अभियांत्रिकी संकाय का1 प्रतिभागी शामिल रहा।

​अत्याधुनिक तकनीकी सत्र और व्यावहारिक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण सत्रों के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से विकसित हो रहे विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें जेनरेटिव एआई, रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जेनरेशन (RAG), मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल (MCP), इंटेलिजेंट एआई एजेंट्स और विजन एआई प्रमुख रहे। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि किस प्रकार इन अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग शिक्षा, अनुसंधान (शोध) और अन्य दैनिक व्यावहारिक कार्यों में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

इस कार्यशाला का सबसे मुख्य आकर्षण इसका हैंड्स-ऑन (व्यावहारिक) प्रशिक्षण रहा। हैंड्स-ऑन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को सीधे एआई उपकरणों और तकनीकों के साथ काम करने का अवसर मिला। इसमें मानव-केंद्रित स्वचालन और वास्तविक दुनिया की जटिल समस्याओं को सुलझाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया, जिससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को अकादमिक और तकनीकी रूप से एक नया मंच मिला।