जो अमेरिका और इजरायल कहेंगे, वही करेंगे प्राइम मिनिस्टर मोदी… राहुल गांधी का ऑल पार्टी मीटिंग से किनारा, विदेश नीति को बताया ‘यूनिवर्सल मजाक’

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नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में धधक रही महायुद्ध की आग अब भारत के राजनीतिक गलियारों तक पहुँच गई है। केंद्र सरकार द्वारा आज बुधवार को बुलाई गई ‘सर्वदलीय बैठक’ (All Party Meeting) से पहले सियासत में बड़ा विस्फोट हुआ है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने न केवल इस बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। राहुल का आरोप है कि भारत की कूटनीति अब देशहित में नहीं, बल्कि वाशिंगटन और तेल अवीव के इशारों पर चल रही है।

केरल का दौरा या सरकार से आर-पार की जंग?

राहुल गांधी ने बैठक से दूरी बनाने का प्राथमिक कारण अपने पूर्व निर्धारित केरल दौरे को बताया है। हालांकि, उनके बयानों के तल्ख तेवर बताते हैं कि यह फैसला महज व्यस्तता नहीं, बल्कि गहरी नाराजगी का परिणाम है। सरकार पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, “आपने पूरे लोकतांत्रिक ढांचे को ध्वस्त कर दिया है। संवाद का जो स्ट्रक्चर मोदी जी ने बनाया है, उसमें बुनियादी कमियां हैं जिन्हें अब सुधारना मुमकिन नहीं दिखता।”

​“अमेरिका-इजरायल जो कहेंगे, मोदी वही करेंगे”

प्रधानमंत्री की कूटनीति को ‘यूनिवर्सल मजाक’ करार देते हुए राहुल गांधी ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया, “भारत की विदेश नीति अब स्वतंत्र नहीं रही। जो अमेरिका और इजरायल कहेंगे, प्रधानमंत्री मोदी वही करेंगे। वह हिंदुस्तान के किसानों या जनता के हित में फैसले नहीं ले रहे हैं क्योंकि वह ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ (दबाव में) हैं।” राहुल ने आशंका जताई कि इस कूटनीतिक विफलता का खामियाजा देश की जनता को LPG, पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत और आसमान छूती कीमतों के रूप में भुगतना पड़ेगा।

​राज्यसभा में पीएम मोदी का पलटवार

दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ही राज्यसभा में सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया था। पीएम ने सदन को आश्वस्त किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से वे पश्चिम एशिया के लगभग सभी प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की वार्ता कर चुके हैं। भारत लगातार ईरान, इजरायल और अमेरिका के संपर्क में है और हमारा एकमात्र लक्ष्य संवाद के जरिए शांति बहाली है। पीएम ने ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों को खुला रखने पर जोर दिया ताकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर आंच न आए।

कूटनीति बनाम राजनीति: क्या होगा अंजाम?

विपक्ष का मानना है कि सरकार मिडिल ईस्ट संकट के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को कम करके आंक रही है। राहुल गांधी के आरोपों के बाद अब सबकी नजरें आज होने वाली सर्वदलीय बैठक पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस की ओर से कौन नेतृत्व करेगा और क्या सरकार विपक्ष के इन तीखे सवालों का कोई ठोस जवाब दे पाएगी या देश की विदेश नीति घरेलू राजनीति की भेंट चढ़ जाएगी।