आगरा में सेहत से खिलवाड़ का बड़ा भंडाफोड़: कागारौल में पकड़ा गया 2760 किलो प्रतिबंधित खेसारी दाल का जखीरा

स्थानीय समाचार

आगरा: ताजनगरी के ग्रामीण इलाकों में लोगों की सेहत के साथ किए जा रहे एक बड़े खिलवाड़ का भंडाफोड़ हुआ है। जनपद के कागारौल क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक बड़ी और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए भारी मात्रा में प्रतिबंधित खेसारी दाल बरामद की है।

मुनाफाखोर इस खतरनाक दाल को सीधे-साधे ग्रामीणों को ‘सस्ती अरहर दाल’ बताकर धड़ल्ले से बेच रहे थे। मंगलवार की देर रात नगला घुरैला स्थित एक गोदाम पर अचानक मारे गए छापे में विभाग को 2760 किलोग्राम खेसारी दाल की खेप मिली, जिसके बाद से ही मिलावटखोरों और अवैध खाद्य कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, यह सिर्फ एक गोदाम तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।

सस्ते दाम ने पैदा किया शक, आधी रात को पड़ी रेड

​स्थानीय सूत्रों की मानें तो पिछले काफी समय से कागारौल और आसपास के देहाती इलाकों में बाजार भाव से बेहद कम दाम पर अरहर की दाल बेची जा रही थी। ग्रामीणों को दाल की गुणवत्ता और उसके असली होने पर शक तो था, लेकिन कोई पुख्ता सबूत नहीं मिल पा रहा था। आखिरकार मामले की सटीक जानकारी एक मुखबिर के जरिए विभाग तक पहुंची।

सहायक आयुक्त (खाद्य) महेंद्र श्रीवास्तव के कड़े निर्देश पर मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम ने पूरी गोपनीयता बरतते हुए देर रात नगला घुरैला के संदिग्ध गोदाम पर धावा बोल दिया, जहां बोरो में भरकर रखी गई कुल 92 कट्टे (2760 किलो) प्रतिबंधित खेसारी दाल बरामद कर ली गई।

स्नायु तंत्र को पंगु बना देती है यह दाल, यूपी में है पूरी तरह बैन

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में खेसारी दाल के भंडारण, उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से कानूनी प्रतिबंध लागू है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, खेसारी दाल का लगातार सेवन मानव शरीर, विशेषकर तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) के लिए बेहद घातक है। इसके अत्यधिक इस्तेमाल से ‘लैथिरिज़्म’ नामक लाइलाज बीमारी हो सकती है, जिससे इंसान के निचले हिस्से (पैरों) में पैरालिसिस यानी कंगापन आ सकता है। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए इसे प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन चंद रुपयों के लालच में कारोबारी इसे अरहर की दाल में मिलाकर या सीधे अरहर बताकर गरीबों की थाली तक पहुंचा रहे थे।

​सप्लाई चेन और फेरीवालों के नेटवर्क पर टिकी पुलिस की नजर

अब विभागीय एजेंसियां इस पूरे काले कारोबार की जड़ों को खोदने में जुट गई हैं। जांच इस बिंदु पर केंद्रित है कि इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दाल आगरा की सीमा के भीतर आखिर कहाँ से लाई गई और इसके मुख्य सप्लायर कौन हैं। यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि इस छापे से पहले भी क्विंटल के हिसाब से दाल गांवों और कस्बों की दुकानों व घरों तक पहुंचाई जा चुकी है। विभाग अब उन फेरीवालों और छोटे दुकानदारों की सूची तैयार कर रहा है जो गांवों में घूम-घूमकर इसे बेचते थे।

​इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र कुमार चौरसिया, रविंद्र सिंह परमार, अजय वर्मा, राकेश यादव, कृष्ण चंदा पटेल और राकेश कुमार शामिल रहे। टीम ने बरामद दाल को फिलहाल सीज कर गोदाम के संचालक करीम खान की सुपुर्दगी में दे दिया है और मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है।