नोएडा में ‘श्रमिक क्रांति’: “11 हजार में कैसे पालें परिवार?”— सड़कों पर उतरे हजारों मजदूरों का छलका दर्द

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नोएडा: दिल्ली से सटे नोएडा के तमाम औद्योगिक क्षेत्रों (Industrial Areas) में इस समय असंतोष की लहर दौड़ रही है। अपनी बुनियादी जरूरतों और सम्मान के लिए हजारों फैक्ट्री मजदूर अब सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी श्रमिकों का साफ कहना है कि कमरतोड़ महंगाई के इस दौर में मौजूदा वेतन के साथ जीवन का निर्वाह करना नामुमकिन हो गया है। मजदूरों की मांग है कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए न्यूनतम वेतन 18 से 20 हजार रुपये तय किया जाए।

​मजदूरों की आर्थिक बेबसी:

प्रदर्शन में शामिल श्रमिकों ने अपनी आर्थिक तंगहाली का ब्योरा देते हुए बताया कि एक हेल्पर को महज 11,000 और ऑपरेटर को करीब 13,500 रुपये मिलते हैं। मजदूरों ने सवाल उठाया कि “जब 4000 रुपये कमरे का किराया और 4000 रुपये रसोई गैस व राशन में चले जाते हैं, तो बच्चों की पढ़ाई और अन्य खर्च कैसे पूरे होंगे?” उनका कहना है कि कंपनियों के स्टाफ की सैलरी में तो हर साल हजारों का इजाफा होता है, लेकिन मजदूरों के हिस्से में मात्र 100-200 रुपये की बढ़ोतरी आती है, जो उनके साथ भद्दा मजाक है।

​कार्यस्थल पर ‘अमानवीय’ व्यवहार के आरोप:

इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला मजदूर भी शामिल हैं, जिन्होंने फैक्ट्रियों के भीतर के माहौल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला श्रमिकों का कहना है कि उन पर काम के टारगेट का इतना दबाव रहता है कि उन्हें पानी पीने या टॉयलेट जाने तक की अनुमति नहीं दी जाती। विरोध करने पर अधिकारियों द्वारा बदतमीजी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे 9-9 घंटे काम लिया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान या तो मिलता नहीं या फिर सिंगल रेट पर ही निपटा दिया जाता है।

गंभीर आरोपों से हड़कंप:

प्रदर्शन के दौरान कुछ श्रमिकों ने कंपनी प्रबंधन पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि जबरन नाइट शिफ्ट लगवाई जाती है और कई मामलों में तो दबाव बनाकर अनैतिक तरीके से काम कराने की कोशिश की जाती है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें मशीनों के सामने रोबोट की तरह बैठा दिया जाता है, जहां मानवीय संवेदनाओं के लिए कोई जगह नहीं है।

क्या हैं प्रमुख मांगें?

श्रमिकों ने अपनी मांगों का चार्टर स्पष्ट कर दिया है । हेल्पर की न्यूनतम सैलरी 15,000 और कुशल श्रमिकों की 20,000 रुपये हो। ​ओवरटाइम का भुगतान नियमानुसार ‘डबल रेट’ पर किया जाए। कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार और समान वेतन नीति लागू हो। जबरन नाइट शिफ्ट और टारगेट के नाम पर मानसिक उत्पीड़न बंद हो।

​मजदूरों ने दोटूक लहजे में कहा है कि वे अब केवल आश्वासन से नहीं मानेंगे। जब तक उनकी मांगें लिखित रूप में स्वीकार नहीं की जातीं, उनका आंदोलन और तेज होगा। फिलहाल, नोएडा के इंडस्ट्रियल बेल्ट में तनाव बना हुआ है और पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है।