आगरा: शहर के दरेसी नंबर-2 स्थित ‘पुरानी चुंगी’ मैदान को आधिकारिक रूप से ‘क्रांति स्थल’ घोषित करने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस ऐतिहासिक स्थल के महत्व को देखते हुए जिलाधिकारी आगरा से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। इस दिशा में कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों का सत्यापन शुरू कर दिया है।
इतिहास के पन्नों में पुरानी चुंगी मैदान का महत्व
राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महापौर श्रीमती हेमलता दिवाकर को भेजे गए प्रार्थना पत्र में इस मैदान के स्वर्णिम इतिहास को रेखांकित किया था। शर्मा के अनुसार, वर्ष 1940 में आगरा के क्रांतिकारियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अपने खून से पत्र लिखकर इस मैदान पर आमंत्रित किया था। इसी ऐतिहासिक स्थल पर नेताजी ने अपना अमर नारा, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” दिया था।
इसके अलावा, 10 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ आंदोलन के आह्वान पर आगरा के स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी मैदान पर शपथ ली थी। इसी दौरान अंग्रेजों द्वारा चलाई गई गोलियों में 17 वर्षीय युवा क्रांतिकारी परशुराम शहीद हुए थे, जिनके बलिदान को आज भी स्थानीय लोग गर्व से याद करते हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय की सक्रियता और प्रशासन की जांच
वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा द्वारा 11 मई 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने 12 जून 2026 को जिलाधिकारी आगरा को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। इस रिपोर्ट को 3 जुलाई 2026 तक प्रेषित करने के लिए कहा गया है।
जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में, उपजिलाधिकारी (राजस्व एवं आपदा) द्वारा तहसील कार्यालय के माध्यम से सत्यापन प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी कड़ी में आज तहसील के कर्मचारी अंशुल कुमार ने दीवानी कचहरी पहुंचकर वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के बयान दर्ज किए और उनसे इस ऐतिहासिक दावे से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली।
मांग: क्रांति स्थल और प्रतिमा स्थापना
अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा और अन्य स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का स्पष्ट मानना है कि स्वतंत्रता संग्राम में इस मैदान का योगदान अद्वितीय है। उनकी मांग है कि पुरानी चुंगी मैदान को आधिकारिक रूप से ‘क्रांति स्थल’ घोषित किया जाए। यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शहीद परशुराम की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएं।
इस पहल से न केवल आगरा के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को उचित सम्मान मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी इन महान बलिदानियों की गाथाओं से प्रेरणा ले सकेंगी। अब पूरे शहर की निगाहें जिलाधिकारी की रिपोर्ट और शासन के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।


