आगरा। सदियों की गुलामी के बाद आगरा किले को मुगलों के चंगुल से आजाद कराने वाले भरतपुर रियासत के अजेय योद्धाओं की स्मृति आज अपने ही शहर में उपेक्षा का शिकार है। अखिल भारतीय जाट महासभा ने इस मुद्दे पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए योगी सरकार के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह को ज्ञापन सौंपा है। महासभा का कहना है कि जिस आगरा को महाराजा सूरजमल और महाराजा जवाहर सिंह ने 1761 में मुगलिया सत्ता से मुक्त कराया था, आज उसी शहर में उनकी एक प्रतिमा तक नसीब नहीं है।
13 साल रहा जाटों का शासन, पर पहचान गायब
जाट महासभा के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित करते हुए बताया कि महाराजा सूरजमल, महाराजा जवाहर सिंह, महाराजा रणजीत सिंह और महाराजा रतन सिंह ने करीब 13 वर्षों तक आगरा किले से शासन कर ब्रज की जनता को मुगलिया अत्याचारों से निजात दिलाई थी। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतिहास के इतने बड़े गौरवशाली अध्याय को प्रशासनिक फाइलों में दबाकर रख दिया गया है।
2020 से लंबित है मांग, प्रशासन मौन
महासभा पिछले 5 वर्षों से लगातार मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ और स्थानीय प्रशासन से आगरा किले के सामने महाराजा सूरजमल और महाराजा जवाहर सिंह की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने की मांग कर रही है। हालांकि, 2025 में संस्कृति विभाग द्वारा पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी से मांगी गई आख्या पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी सुस्ती से नाराज होकर पदाधिकारियों ने भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनियां के साथ सर्किट हाउस में प्रभारी मंत्री से मुलाकात की।
मेट्रो स्टेशन और ‘अकबर की कब्र’ का मुद्दा
प्रतिमा के साथ-साथ महासभा ने निर्माणाधीन सिकंदरा मेट्रो स्टेशन का नामकरण वीर योद्धा रामकी चाहर के नाम पर करने की पुरजोर मांग की है। इतिहास का हवाला देते हुए बताया गया कि औरंगजेब द्वारा वीर गोकुला जाट की नृशंस हत्या के विरोध में रामकी चाहर और राजाराम जाट ने ही सिकंदरा पर कब्जा कर अकबर की अस्थियों को बाहर निकाला था। यह मांग भी लंबे समय से समुदाय के स्वाभिमान से जुड़ी हुई है।
उपेक्षा पर छलका दर्द
जाट महासभा ने रोष जताते हुए कहा कि प्रशासन के पास बलिदानियों की स्मृति को संरक्षित करने का समय नहीं है। पर्यटन विभाग के पत्रों का जवाब न देना शासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
मुलाकात के दौरान यशपाल राणा, देवेंद्र चाहर, भूदेव सिंह प्रधान, गजेंद्र नरवार और लोकेश चौधरी सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि वीरों को सम्मान नहीं मिला तो आंदोलन को तेज किया जाएगा।

