आगरा: ताजनगरी के फतेहपुरसीकरी क्षेत्र में बाल विवाह रोकने का एक अनोखा और साहसिक मामला सामने आया है। यहाँ एक पिता ने बेटे की कम उम्र में शादी के खिलाफ न केवल आवाज़ उठाई, बल्कि खुद पुलिस को बुलाकर निकाह रुकवा दिया। पुलिस के पहुँचते ही दुल्हन के घर मची अफरा-तफरी के बीच मेहमान दावत छोड़कर खिसक गए। पिता के इस कदम की अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
मां की जिद पर भारी पड़ा पिता का साहस
मिली जानकारी के अनुसार, एक परिवार में नाबालिग बेटे के निकाह को लेकर ठन गई थी। बेटे की मां हर हाल में निकाह कराने पर अड़ी हुई थी, जबकि पिता इस फैसले के सख्त खिलाफ थे। पिता का तर्क था कि बेटा अभी नाबालिग है और इस उम्र में निकाह उसके भविष्य, पढ़ाई और मानसिक विकास को बर्बाद कर देगा। जब घर के भीतर बात नहीं बनी, तो पिता ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए सीधे थाना फतेहपुरसीकरी पुलिस को सूचना दे दी।
दुल्हन के घर पुलिस की ‘एंट्री’ से पसरा सन्नाटा
निकाह की तैयारियां जोरों पर थीं, मेहमान जुट चुके थे और दावत का दौर चल रहा था। तभी पिता के साथ पुलिस टीम ने मौके पर दस्तक दी। खाकी वर्दी को देखते ही उत्सव का माहौल सन्नाटे में बदल गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को सख्त लहजे में समझाया कि नाबालिग का निकाह कराना एक गंभीर कानूनन अपराध है। पुलिस की सख्ती देख निकाह की रस्में बीच में ही रोक दी गईं।
लड़की पक्ष को सख्त चेतावनी: “कानून से बड़ा कोई रिश्ता नहीं”
पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को बाल विवाह के कानूनी परिणामों से अवगत कराया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया किनाबालिग की शादी करना, उसमें सहयोग करना या जानकारी छिपाना, तीनों ही अपराध की श्रेणी में आते हैं।
चेतावनी के बाद लड़की पक्ष ने लिखित आश्वासन दिया कि वे नाबालिग लड़के से निकाह नहीं करेंगे। पुलिस ने नसीहत दी कि बच्चों का विवाह उनकी शारीरिक और मानसिक परिपक्वता (कानूनी उम्र) पूरी होने के बाद ही किया जाए।
समाज के लिए मिसाल बना एक पिता का फैसला
अक्सर परिवारों में सामाजिक बदनामी के डर से लोग गलत परंपराओं के आगे झुक जाते हैं, लेकिन इस मामले में पिता ने अपने बच्चे के अधिकारों को प्राथमिकता दी। विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह न केवल शिक्षा छीनता है, बल्कि यह आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी बड़ा कारण है।
आगरा का यह मामला संदेश देता है कि यदि परिवार का एक सदस्य भी जागरूक हो, तो कुप्रथाओं की बेड़ियाँ तोड़ी जा सकती हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने भी यह साफ कर दिया है कि प्रशासन बाल विवाह जैसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है।

