यूपी में ‘स्लो पॉइजन’ बन रहा है पानी! 22 जिलों में मिले यूरेनियम जैसे घातक तत्व, अलीगढ़ समेत कई शहरों का भूजल का स्तर चिंताजनक: CSIR-IITR की रिपोर्ट

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अलीगढ़/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पीने के पानी की शुद्धता को लेकर एक डरावनी सच्चाई सामने आई है। CSIR-IITR की ताज़ा रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि प्रदेश के बड़े हिस्से में भूजल अब पीने लायक नहीं रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ सहित कई जिलों के पानी में यूरेनियम, फ्लोराइड, आर्सेनिक और नाइट्रेट जैसे घातक तत्व निर्धारित मानकों से कहीं अधिक पाए गए हैं, जो कैंसर और हड्डियों की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

यूरेनियम की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यूरेनियम को लेकर हुआ है। वाराणसी, सोनभद्र, अमरोहा और उन्नाव समेत प्रदेश के 22 जिलों के भूजल में यूरेनियम के अंश मिले हैं। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला यह तत्व यदि पानी के जरिए शरीर में जाए, तो यह किडनी और हड्डियों को बुरी तरह प्रभावित करता है।

​जिलों की स्थिति: कहाँ कौन सा ‘ज़हर’?

​संसद में पेश आंकड़ों और CSIR की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की स्थिति कुछ इस प्रकार है:

​फ्लोराइड: 24 जिलों में मानक से अधिक (हड्डियों और दांतों के लिए घातक)।

आर्सेनिक: 14 जिलों में अधिकता (त्वचा रोग और कैंसर का खतरा)।

नाइट्रेट: 48 जिलों में भारी मात्रा (बच्चों के लिए बेहद खतरनाक)।

आयरन और मैगनीज: क्रमशः 46 और 26 जिलों में सीमा से बाहर।

सीसा (Lead): बदायूं और चंदौली में सीसा भी खतरे के निशान के करीब पहुँच गया है।

अलीगढ़ में गहराता संकट: 2050 तक की चेतावनी

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के भूगोल विभाग के डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन और औद्योगिक कचरे (Industrial Waste) के कारण अलीगढ़ के पानी में जिंक और अन्य भारी धातुओं की मात्रा बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो साल 2050 तक शुद्ध पेयजल का अकाल पड़ सकता है।

​पानी बढ़ा, लेकिन शुद्धता घटी

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के आंकड़े बताते हैं कि 2017 के मुकाबले 2025 में भूजल का पुनर्भरण (Recharge) बढ़ा है (73.39 अरब घन मीटर), लेकिन दोहन की दर अभी भी 70% के ऊंचे स्तर पर है। यानी जमीन के नीचे पानी की मात्रा तो बढ़ी है, लेकिन वह रसायनों के कारण सुरक्षित नहीं रह गया है।

​औद्योगिक क्षेत्रों पर दबाव

CSIR-NEERI के मूल्यांकन में मेरठ, अलीगढ़, आगरा और मथुरा जैसे औद्योगिक शहरों के पास स्थित बोरवेल के नमूनों में भारी धातुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है। यमुना और हिंडन नदी के किनारे का औद्योगिक अपशिष्ट सीधे तौर पर भूजल को ज़हरीला बना रहा है।