नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की वरिष्ठ नेता नेहा बोरा और जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत कई प्रमुख हस्तियों को एक बार फिर तीखे जनविरोध का सामना करना पड़ा। प्रेस कॉन्फ्रेंस की कार्यवाही के दौरान अचानक कुछ आक्रोशित लोगों ने जमकर नारेबाजी करना शुरू कर दिया। विरोध दर्ज करा रहे लोगों ने ‘बंद करो, दफा हो जाओ’ जैसे तीखे नारे लगाते हुए नेताओं का कड़ा विरोध किया।
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कई अन्य सहभागी संगठनों ने देश की जनता से आगामी शनिवार को नई दिल्ली के कनॉट प्लेस (CP) स्थित प्रसिद्ध सेंट्रल पार्क में हाथों में राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) लेकर पहुंचने की बड़ी अपील की है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस जन-आह्वान का खुलकर समर्थन करने का ऐलान किया है।
आयोजकों के मुताबिक, यह प्रस्तावित कार्यक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों का ही अगला बड़ा चरण है।
विपक्षी दिग्गजों की हिरासत और मेट्रो बंदी पर घेराव
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीजेपी के संयोजक अभिजीत दिपके ने कहा कि बीते 10 से 15 दिनों से दिल्ली की सड़कों पर विभिन्न छात्र संगठन और युवा अधिकार मंच लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों को जबरन मौके से हटाकर हिरासत में भेजा जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि जब विपक्षी दलों के बड़े नेता इन युवाओं के समर्थन में पहुंचे, तो उन्हें भी पुलिस हिरासत में ले लिया गया। इस संदर्भ में उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन जैसे शीर्ष नेताओं की हिरासत का विशेष रूप से उल्लेख किया।
दिपके ने आगे आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने के लिए प्रशासन द्वारा रेलवे सेवाओं तक को ठप कर दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि 10 अक्तूबर को आहूत प्रदर्शन के दौरान ऐसा अभूतपूर्व कदम उठाया गया, जो देश के लोकतांत्रिक इतिहास में शायद पहली बार देखने को मिला है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और स्थिति से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां बुलाए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रदर्शनों को रोकने के लिए उठाए जा रहे इन मनमाने कदमों पर सरकार से सवाल पूछे जाने चाहिए।
आइसा नेता नेहा बोरा ने पुलिस पर दागे सवाल
दूसरी ओर, आइसा नेता नेहा बोरा ने एक महिला पत्रकार से जुड़े कथित मामले को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित महिला पत्रकार ने विवेक भगत के खिलाफ यौन उत्पीड़न की लिखित शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क साधा था, लेकिन निष्पक्ष जांच करने के बजाय उल्टे पीड़ित पत्रकार के खिलाफ ही जवाबी प्राथमिकी (काउंटर एफआईआर) दर्ज कर दी गई।बोरा ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि न्याय की गुहार लगाने वाले हर नागरिक की शिकायत पर पुलिस को पूरी तरह से निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन का मुख्य दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और मामलों की पारदर्शी जांच करना है, न कि किसी विशिष्ट राजनीतिक पक्ष के समर्थन में काम करना।
