संसद सत्र में गतिरोध खत्म करने की बड़ी पहल: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ की बैठक

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नई दिल्ली: संसद के चल रहे मानसून सत्र के दौरान पिछले कई दिनों से दोनों सदनों में भारी गतिरोध और हंगामे की स्थिति बनी हुई है। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले और दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने बुधवार को संसद परिसर के भीतर एक बड़ा मार्च निकाला। इसी बीच, संसद के इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बड़ी और अहम पहल की गई है।

प्राप्त खबरों के अनुसार, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू संसद में जारी गतिरोध को सुलझाने के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर रहे हैं। संसद भवन परिसर में स्थित विपक्ष के नेता के कार्यालय में हो रही इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी विशेष रूप से मौजूद हैं।

बता दें कि संसद के दोनों सदनों में लगातार जारी गतिरोध को खत्म करने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के मुद्दे पर चर्चा के लिए यह बैठक बुलाई गई। संसद में विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है, जिसके कारण कई दिनों से लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। ऐसे में इस बैठक को गतिरोध समाप्त करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।

विपक्ष ने संसद परिसर में मार्च निकाला

इससे पहले लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी सांसद सदन में पोस्टर लेकर पहुंचे थे। कार्यवाही स्थगित होने से पहले विपक्षी दलों ने बुधवार को संसद परिसर में मार्च निकाला। यह मार्च संसद परिसर में ‘प्रेरणा स्थल’ में महात्मा गांधी की प्रतिमा से संसद भवन के मकर द्वार तक निकला गया।

यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं और न ही कोई राज दरबार है : प्रियंका गांधी

मार्च में शामिल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता में बैठे लोगों की जनता के प्रति जवाबदेही होती है और यदि पैलेट गन, आंसू गैस तथा लाठीचार्ज का इस्तेमाल हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। मार्च के दौरान विपक्षी सांसदों ने एक बड़ा बैनर पकड़ रखा था, जिस पर ‘अमित शाह, जवाब दो’ लिखा हुआ था। विपक्षी दलों ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। मार्च में शामिल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव समेत विभिन्न विपक्षी दलों के कई सांसद और नेता शामिल हुए। प्रियंका गांधी ने कहा, कि संदेश यह है कि जो लोग सत्ता में हैं, उनकी लोगों के प्रति जिम्मेदारी है। यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं है और न ही कोई राज दरबार है।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष मांग कर रहा है कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और राष्ट्र से संबंधित मुद्दों को संबोधित करें। यह खेदजनक है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों सदन से अनुपस्थित हैं और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी जवाबदेही भी गायब है।

वहीं कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को संसद में आकर जंतर-मंतर पर छात्रों पर बल प्रयोग और पैलेट गन चलाने के बारे में बयान देना चाहिए। उन्हें ‘चंदा चोरी’ यानी भगवान राम को चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर भी बयान देना चाहिए। साथ ही, उन्हें जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर भी बयान देना चाहिए, क्योंकि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर की जनता से वादा किया था कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी मार्च में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हमने पहले भी कहा है कि जनता की भावनाओं और लोगों की आजीविका से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे। E20 फ्यूल से इंजन खराब हो रहे हैं और गाड़ियों के माइलेज पर भी असर पड़ रहा है। सरकार ने इस मामले में कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो सीधे आम लोगों पर असर डालता है।