समुद्री मिशन के तहत भारत ने बनाई हिंद महासागर में खनिज भंडार खोजने की योजना

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डॉ. थंबन मेलोथ, गोवा स्थित राष्ट्रीय ध्रुवीय और समुद्री अनुसंधान (एनसीपीओआर) के निदेशक हैं। उन्होंने कहा, ‘यह सिर्फ शुरुआत है। इससे हमें भविष्य में बेथिमैट्रिक सर्वे और भूवैज्ञानिक गतिविधियों के लिए संभावित स्थानों की पहचान होगी। हम समुद्र की गहराई में 3,000 से 6,000 मीटर के बीच सीमित सर्वे करेंगे।’

तलाशी अभियान से वैज्ञानिकों को मिलेगी बड़ी मदद

समुद्री स्वचालित पनडुब्बियों (एयूवी) को मुख्य जहाज से जोड़कर 15 स्थानों से हाई लेवल की जियोलॉजिकल तस्वीरें इकट्ठा करेंगे, जिनकी विस्तृत जांच की जाएगी। एनसीपीओआर ने विशेषज्ञ जहाज की भी तलाश कर ली है, जिसमें सभी वैज्ञानिक सुविधाएं शामिल हैं। इस जहाज में पर्याप्त अनुभवी क्रू होंगे जो समुद्री अभियान, सर्वेक्षण और डेटा प्रॉसिसिंग में दक्ष हों.

डॉ. मेलोथ ने कहा, ‘हम इन खनिज संसाधनों के 3डी मॉडल्स बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा रिसर्च करना चाहेंगे। जब हमें जरूरी आंकड़े मिल जाएंगे, तब हम उसकी सैंपलिंग करने के बारे में सोच सकेंगे। यह एक मुश्किल यात्रा होगी।’

समुद्र उगलेगा सोना, चांदी और बहुत से बहुमूल्य खनिज

भारत ने पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सतह प्राधिकरण से हिंद महासागर के 10 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में पॉलीमेटैलिक सल्फाइड (पीएमएस) के खनन के अधिकार सुनिश्चित कर लिए हैं। ये पॉलीमेटैलिक सल्फाइड (पीएमएस) समुद्र की सतह के पास जमे होते हैं। इनमें लोहा, तांबा और जिंक के साथ-साथ सोना, चांदी, पैलेडियम और प्लेटेनियम जैसी बहुमूल्य धातुएं भी शामिल होती है। ये बड़े खनिज भंडार आर्थिक और सामरिक, दोनों ही दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं। इस कारण दुनियाभर के देश इसकी तलाश में जुटे रहते हैं।

दिसंबर से शुरू हो सकता है सर्वे का काम

इस परियोजना का लक्ष्य भारत के अधिकार क्षेत्र में आने वाले अनुसंधान के इलाकों में इन संसाधनों की तलाश करना है। ये इलाके हिंद महासागर में सेंट्रल इंडियन रिज के दक्षिणी भाग और साउथ-वेस्ट इंडियन रिज के पूर्वी भाग में हैं। टेंडर के लिए बोलियां लगाने की शुरुआत 17 जुलाई से हो सकती है जो 28 अगस्त तक स्वीकार की जाएंगी। टेंडर जारी हो जाने के बाद सर्वे का काम शुरुआती दिसंबर से शुरू होने की संभावना है।

Compiled: up18 News